search
 Forgot password?
 Register now
search

महिलाओं से ज्यादा पुरुष हो रहे हैं कैंसर का शिकार, ब्रेस्ट और ओरल कैंसर के मामलों में भी हुई बढ़ोतरी

deltin33 2025-11-20 12:58:55 views 890
  

कैंसर के मामलों में तेजी से हो रही है वृद्धि (Picture Courtesy: Freepik)



प्रेट्र,कोलकाता। देश में कैंसर विशेष रूप से ओरल और ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। यह जीवनशैली में बदलाव, तंबाकू के उपयोग, देर से निदान और पर्यावरणीय कारकों के कारण हो रहा है। यह बात प्रसिद्ध हेमेटोलजिस्ट और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डा. मैमन चांडी ने कही। चांडी ने कहा कि ये प्रवृत्तियां देश के लिए प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती प्रस्तुत करती हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
ओरल कैंसर के बढ़ रहे मामले

उन्होंने कहा कि 1990 से 2021 के बीच भारत में ओरल कैंसर की मृत्यु दर 5.32 से बढ़कर 5.92 प्रति एक लाख हो गई और दिव्यांगता समायोजित जीवन वर्ष (डीएएलवाई) दर 152.94 से बढ़कर 163.61 हो गई।
पुरुषों में कैंसर के ज्यादा मामले

चांडी ने कहा कि पूर्वानुमान बताते हैं कि 2022 से 2031 के बीच ओरल कैंसर के मेट्रिक्स में वृद्धि की प्रवृत्ति है, जिसमें एएसपीआर ( आयु- मानकीकृत घटना दर ) 2031 तक 10.15 प्रति 100,000 और मृत्यु दर (एएसपीआर) 29. 38 प्रति 100,000 तक पहुंचने की उम्मीद है। कोलकाता के टाटा मेडिकल सेंटर के पूर्व निदेशक ने कहा कि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में लगातार उच्च दरें देखी जाती हैं।

=
ब्रेस्ट और ओरल कैंसर के मामले बढ़े

चांडी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ब्रेस्ट कैंसर अब महिलाओं में सबसे सामान्य कैंसर बन गया है, जो फेफड़े कैंसर को पार कर गया है। चांडी ने कहा कि भारत में महिलाओं में एएसपीआर 1990 से 2016 के बीच लगभग 40 प्रतिशत बढ़ गया है। हर राज्य में ब्रेस्ट कैंसर में वृद्धि रिपोर्ट की गई है। ब्रेस्ट कैंसर के मुख्य कारणों में जीवनशैली के कारक, मोटापा, शराब का सेवन, देर से गर्भधारण और बेहतर निदान शामिल हैं।
आईआईटी मद्रास में कैंसर जीनोम एटलस को लांच किया

उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में दो पूरक माडलों का पालन करता है। एक निजी क्षेत्र, जहां मरीजों को मल्टी स्पेशलिटी या तृतीयक अस्पतालों में भेजा जाता है और दूसरा सार्वजनिक क्षेत्र, जहां मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर देखा जाता है और राज्य कैंसर अस्पतालों में भेजा जाता है। शोध और जीनोमिक्स पर चांडी ने आइआइटी मद्रास द्वारा लांच किए गए भारत कैंसर जीनोम एटलस (बीसीजीए) को उजागर किया। यह अग्रणी पहल भारत में प्रचलित कैंसरों के आनुवंशिक परिदृश्य को मानचित्रित करती है। वर्तमान में यह मुख्य रूप से डाटा संग्रह का काम है।
कोलोरेक्टल कैंसर का इलाज

उन्होंने डोस्टारलिमैब - जीएक्सली (जेम्परली) नामक पीडी - 1 दवाओं का उल्लेख किया, जिसने निष्क्रिय ट्यूमर वाले कोलोरेक्टल आइआइटी मद्रास में कैंसर जीनोम एटलस कैंसर के मरीजों के एक छोटे समूह में 100 प्रतिशत पूर्ण प्रतिक्रिया प्राप्त की । उन्होंने कहा कि यह अद्भुत है, लेकिन यह केवल चार-पांच प्रतिशत मरीजों पर लागू होता है। बाकी को सर्जरी और कीमोथेरेपी की आवश्यकता है।
इम्यूनोथेरेपी दवा से मिलती है मदद

डोस्टारलिमैब - जीएक्सली (जेम्परली) इम्यूनोथेरेपी दवा है जो टी-कोशिकाओं पर पीडी - 1 प्रोटीन को अवरुद्ध करती है। ताकि उन्हें कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने में मदद मिल सके। रूस द्वारा एमआरएनए कैंसर वैक्सीन की घोषणा पर उन्होंने कहा, इस बारे में अभी तक कोई प्रकाशित क्लिनिकल डाटा नहीं है। चांडी ने कहा कि हम हर साल 10 लाख से अधिक कैंसर के नए मामलों का सामना कर रहे हैं। महिलाओं में ब्रेस्ट, गर्भाशय और अंडाशय के कैंसर सबसे सामान्य हैं, पुरुषों में फेफड़ों, ओरल और प्रोस्टेट कैंसर प्रमुख हैं।
यह भी पढ़ें- क्या तकिए के पास फोन रखने से बढ़ जाता है कैंसर का खतरा? डॉक्टर ने बताई मोबाइल रेडिएशन की सच्चाई
यह भी पढ़ें- अब बैक्टीरिया को \“हैक\“ करके होगा कैंसर का इलाज, बायो-इंजीनियरिंग से तैयार हो रही है दवा
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4610K

Credits

administrator

Credits
467518

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com