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सरकारी भर्तियों में क्लोजिंग डेट के बाद बने प्रमाण पत्र पूरी तरह अमान्य, नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ; सिंगल बेंच का आदेश रद

Chikheang 2025-11-25 04:36:50 views 1072
  

सरकारी भर्तियों में क्लोजिंग डेट के बाद बने प्रमाण पत्र पूरी तरह अमान्य। सांकेतिक फोटो



दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम और दूरगामी प्रभाव वाले आदेश में साफ कर दिया है कि किसी भी सरकारी भर्ती के विज्ञापन में दी गई अंतिम तिथि अपरिवर्तनीय होती है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आरक्षण के लाभ के लिए जरूरी सभी पात्रता प्रमाणपत्र विशेषकर बीसी-ए , बीसी-बी और ईडब्ल्यूएस विज्ञापन की क्लोजिंग डेट तक उम्मीदवार के पास होना अनिवार्य है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

यदि प्रमाणपत्र इसके बाद जारी होता है, तो वह न पात्रता सिद्ध कर सकता है और न ही किसी प्रकार की छूट का आधार बन सकता है। यह फैसला हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनाया, जिसने सिंगल बेंच द्वारा दिए गए उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें कुछ अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि के बाद जारी प्रमाणपत्रों के आधार पर आरक्षण लाभ देने की अनुमति दी गई थी।

यह मामला हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा 21 जून 2024 को जारी उस विज्ञापन से जुड़ा है, जिसमें आयुर्वेदिक मेडिकल आफिसर के 805 पदों पर भर्ती हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए थे। विज्ञापन में साफ उल्लेख था कि 12 जुलाई 2024 तक बीसी-ए , बीसी-बी और ईडब्लूएस सहित सभी आवश्यक प्रमाणपत्र उम्मीदवारों के पास मौजूद होने चाहिएं तथा इस तिथि के बाद जारी कोई भी दस्तावेज मान्य नहीं होगा। इसके बावजूद कई उम्मीदवारों ने या तो पुराने वर्षों के प्रमाणपत्र अपलोड कर दिए या फिर अंतिम तिथि के बाद नए प्रमाणपत्र बनवाकर प्रस्तुत कर दिए।

आयोग ने नियमों का पालन नहीं होने पर ऐसे अभ्यर्थियों को अयोग्य करार दिया। इससे नाराज उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट की सिंगल बेंच में याचिकाएं दायर कर यह तर्क दिया कि उनकी वास्तविक पात्रता अंतिम तिथि से पहले ही मौजूद थी, भले ही प्रमाणपत्र बाद में जारी हुआ हो। सिंगल जज ने इस दलील को स्वीकार करते हुए अंतिम तिथि को “कठोर शर्त” नहीं मानते हुए प्रमाणपत्र को मात्र औपचारिकता बताया।

हरियाणा लोक सेवा आयोग इस आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील पर पहुंचा और कहा कि बीसी-ए , बीसी-बी और ईडब्लूएस पात्रता स्थिर तथ्यों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि वे संबंधित वित्तीय वर्ष की आय और संपत्ति के आधार पर तय होते हैं। इसलिए इन प्रमाणपत्रों को साधारण दस्तावेज नहीं माना जा सकता, बल्कि वे स्वयं पात्रता का साक्ष्य होते हैं।

हरियाणा लोक सेवा आयोग ने दलील दी कि विज्ञापन की शर्तें बिल्कुल स्पष्ट थीं और नियम मानने वालों के साथ अन्याय नहीं किया जा सकता। डिवीजन बेंच के जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर ने आयोग की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि आरक्षण पात्रता तभी सिद्ध मानी जाएगी जब संबंधित प्रमाणपत्र अंतिम तिथि से पहले जारी हों।

उन्होंने टिप्पणी की कि बड़ी संख्या में आवेदकों को देखते हुए प्रक्रिया में “अंतिमता” अनिवार्य है, अन्यथा हर मामले में छूट की मांगों से प्रशासनिक अव्यवस्था फैल जाएगी। अंतत कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि बीसी-ए , बीसी-बी और ईडब्ल्यूएस के अंतिम तिथि के बाद जारी प्रमाणपत्र किसी भी सरकारी भर्ती में स्वीकार नहीं किए जाएंगे और विज्ञापन की शर्तें ही पूरी भर्ती प्रक्रिया का आधार होंगी।
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