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यूपी में डिप्टी सीएम का आदेश भी बेअसर, चार घंटे में पोस्टमार्टम का दावा Fail

cy520520 2025-11-27 01:56:38 views 946
  



जागरण संवाददाता, लखनऊ। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इसी साल 27 जून को परिवारीजन की पीड़ा कम करने के लिए पोस्टमार्टम को अधिकतम चार घंटे में करने के निर्देश दिए थे। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने पोस्टमार्टम की नई गाइडलाइन भी जारी की थी, जिसमें पोस्टमार्टम के लिए 24 घंटे पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की तैनाती के आदेश भी दिए थे। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

सरकार का उद्देश्य दु:ख की घड़ी में आम आदमी को राहत देना था, लेकिन जिम्मेदारों पर उपमुख्यमंत्री के आदेश का भी कोई असर नहीं है। यही वजह है कि केजीएमयू के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर परिवारजन शव के लिए 12-15 घंटे इंतजार को मजबूर हैं।

केस-एक
अमेठी के मुंशीगंज निवासी रामतीर्थ यादव (70) को मंगलवार शाम सड़क पार करते समय बाइक ने टक्कर मार दी। मृतक के भतीजे विपिन यादव ने बताया कि ट्रामा सेंटर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। रात 12 बजे शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, लेकिन बुधवार दोपहर दो बजे तक शव नहीं मिल सका। हम लोग पूरी रात अस्पताल परिसर में भटकते रहे। कई बार अनुरोध किया, पर कोई सुनने वाला नहीं।

केस-दो
चंदौली निवासी रामाश्रय यादव (46) ऋषिकेश में निजी कंपनी में ड्राइवर थे और बेटी की शादी के लिए घर लौट रहे थे। इस दौरान ट्रेन में अचानक तबीयत बिगड़ी। उन्हें मंगलवार को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। चचेरे भाई हौसिला सिंह के अनुसार, डाक्टरों ने देखने के बाद मृत घोषित कर दिया। रात करीब आठ बजे बजे शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, लेकिन बुधवार 11 बजे तक शव नहीं मिल पाया। देरी की वजह पूछा तो ठीक से कोई बात भी नहीं कर रहा था।

केस-तीन
कर्नलगंज निवासी कुलदीप जायसवाल (22) की मंगलवार रात सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। मृतक के चाचा अनिल ने बताया कि रात दो बजे शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, लेकिन बुधवार दोपहर एक बजे तक प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाई थी। कुलपदीप के माता-पिता बेटे की मौत से सदमे में हैं। डिप्टी सीएम ने आदेशित किया है, लेकिन इसके बावजूद पोस्टमार्टम को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। लोग ठीक से बात भी नहीं करते हैं।

अव्यवस्था के बीच दलालों का दबदबा
पोस्टमार्टम हाउस में दलालों का नेटवर्क सक्रिय है। कर्मचारियों की मिलीभगत से जल्द पोस्टमार्टम कराने के नाम पर पीड़ित परिवारजन से वसूली की जाती है। शव को लपेटने वाली पालिथीन, जिसकी कीमत 400–500 रुपये है, उसे भी दोगुणा कीमत पर बेचा जाता है। इसके अलावा भी मृत के परिवार से पैसे की मांग की जाती है।

तीन शिफ्ट में डाक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। अधिकतम चार-छह घंटे में पोस्टमार्टम के लिए निर्देशित किया गया है। इसकी नियमित निगरानी होती है। कई बार पंचनामा पोस्टमार्टम हाउस पहुंचने में पांच-छह घंटे लग जाते है। देरी की मुख्य वजह यही है। हालांकि, उपरोक्त तीनों मामले की जानकारी लेने के बाद स्पष्ट हो पाएगा। -डा. एनबी सिंह, सीएमओ
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