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स्टडी में खुलासा : मानव जीवन पर मंडराया एक और खतरा, बादलों तक पहुंचे कीटनाशक केमिकल्स

cy520520 2025-10-5 04:59:31 views 1273
  मानव जीवन पर मंडरा रहा बड़ा खतरा। (फाइल फोटो)





रॉयटर्स, पेरिस। प्लास्टिक और माइक्रो प्लास्टिक की तरह कीटनाशक मानव सभ्यता के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। हमारे वायुमंडल और खानपान में कीटनाशकों की मौजूदगी के सुबूत तो पहले ही मिल चुके हैं, लेकिन नए अध्ययन में बादलों में भी इनकी मौजूदगी ने खतरनाक संकेत देने शुरू कर दिए हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

विज्ञानी अध्ययन में पाया गया कि बादलों में मौजूद ये कीटनाशक बारिश की बूंदों के साथ हर चीज पर बरस रहे हैं और उसे प्रदूषित कर रहे हैं। फ्रांस के क्लेरमोंट औवर्गे विश्वविद्यालय की रसायनशास्त्री एंजेलिका बियान्को के नेतृत्व में फ्रांस और इटली के विज्ञानी दलों ने 2023 से 2024 के बीच विभिन्न मौसमों में बादलों और बारिश के पानी के नमूनों का अध्ययन किया।


बारिश के पानी में पाए गए 32 तरीके के कीटनाशक

बारिश के पानी में 32 तरह के कीटनाशक पाए गए। खास बात ये है कि इन कीटनाशकों का प्रयोग यूरोप में पिछले एक दशक से अधिक समय से प्रतिबंधित है। बियान्को ने इस अध्ययन के बारे में बताया कि एक तिहाई नमूनों में कीटनाशकों की मात्रा पीने के पानी के लिए निर्धारित मानक स्तर से भी अधिक पाई गई। अध्ययन के आधार पर अनुमान है कि निचले और मध्यम ऊंचाई वाले बादलों में कीटनाशकों की मात्रा छह से लेकर 139 टन तक हो सकती है।


आसान नहीं बादलों को पकड़ना

उन्होंने बताया कि दो मौसमों में विभिन्न जगहों से बारिश के पानी के नमूने इकट्ठे किए गए। फ्रांस में पुए डे डोम वेधशाला में बादलों के नमूने एकत्र किए गए। ये बादल 10 से 50 माइक्रोमीटर आकार की बूंदों से बनते हैं। इन बादलों को बूगी नाम की मशीन के जरिये एकत्र किया गया। बादलों के नमूनों को अधिकतम दो घंटे तक सहेजा जा सकता था।


कहां-कहां पाया जाता है कीटनाशक?

तमाम अध्ययनों के बाद हमने अनुमान लगाया कि फ्रांस के ऊपर मंडरानेवाले बादलों में 6.4 से लेकर 139 टन तक कीटनाशक हो सकते हैं। बादलों में अरबों टन पानी होता है, जो धरती पर हर जगह समान रूप से बरसता है। इस अध्ययन से पर्यावरण के प्रदूषण के प्रति नई सामूहिक जागरूकता बढ़ी है। बियान्को ने बताया कि कीटनाशक हर जगह पाए जाते हैं, चाहे वो नदी हो, झील हो, भूमिगत पानी हो या बारिश हो, लेकिन बादलों में हमें कीटनाशकों के एक और ठिकाने का पता चला है। वायुमंडल की गतिशीलता की वजह से प्रदूषण से सीधे संपर्क में न रहनेवाली जगहों, जैसे ध्रुवीय क्षेत्रों में भी कीटनाशक पहुंच रहे हैं।


बादलों में बदल जाता है कीटनाशकों का स्वरूप

  • बियान्को ने बताया कि बादल केमिकल रिएक्टर का काम करते हैं। सूर्य की किरणों से मिलकर बादलों में फोटोकेमिकल प्रतिक्रिया होती है, जिससे कीटनाशकों का स्वरूप बदल जाता है। उन्होंने बताया कि हमारे अध्ययन में कीटनाशकों जो परिवर्तित स्वरूप मिला, वो इनके मूल रूप से काफी अलग था। इससे ये भी पता चला कि वायुमंडल में कीटनाशकों का प्रभाव घटता भी है।
  • बियान्को ने कहा कि इस मुद्दे पर और अधिक शोध की जरूरत है, ताकि नई जानकारियां सामने आ सकें और साथ ही कीटनाशकों का प्रयोग कम से कम करने के लिए भी जागरूकता बढ़ाई जा सके। पहले भी हो चुके हैं प्रयोग हाल में शोधकर्ता लुडोविक मेयर और उनके सहयोगियों ने यूरोप में 29 स्थानों पर वायुमंडलीय एरोसोल (हवा में मौजूद छोटे-छोटे कण) में कीटनाशकों की मौजूदगी के बारे में पता लगाया था।
  • इसमें से कई क्षोभमंडल (ट्रोपोस्फेयर) में भी पाए गए, जो पृथ्वी के वायुमंडल की पहली परत है। ये परत धरती से एक से दो किलोमीटर की ऊंचाई से शुरू होती है। 1990 के दशक में भी बारिश में कीटनाशकों की मौजूदगी का अध्ययन किया गया था, लेकिन इनकी मात्रा का पता नहीं चल सका था।
  • 1991 में जर्मन शोधकर्ता फ्रांस ट्राटनर की टीम ने बादलों में मौजूद अट्राजाइन हर्बीसाइड का पता लगाया था। इसे मक्का के खेतों में इस्तेमाल किया जाता था। बाद में इस पर प्रतिबंध लगाया गया।
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