search
 Forgot password?
 Register now
search

मकोका केस में द्वारका कोर्ट का बड़ा फैसला, कुख्यात गैंगस्टर विकास लगरपुरिया और धीरपाल काना दोषी करार

deltin33 2025-12-12 06:05:48 views 693
  

प्रतीकात्मक तस्वीर।



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने संगठित अपराध पर लगाम लगाने वाले सख्त कानून महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) से जुड़े एक अहम मामले में कुख्यात गैंगस्टर विकास गुलिया उर्फ विकास लगरपुरिया और उसके साथी धीरपाल उर्फ काना को दोषी करार दिया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

विशेष जज एवं एएसजे-03, वंदना जैन की अदालत ने 10 दिसंबर को फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को नजफगढ़ थाने में दर्ज मामले में मकोका की धारा 3 के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, कोर्ट ने दोनों को इसी कानून की धारा 4 (अन्य सहायक प्रावधान) के आरोपों से बरी कर दिया है।

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि दोनों को आज अलग से विस्तृत फैसला सुनाया गया है। विकास गुलिया उर्फ विकास लगरपुरिया को मंडोली जेल नंबर 14 से, जबकि धीरपाल काना को रोहिणी जेल नंबर 10 से न्यायिक हिरासत (जेसी) में पेश किया गया था। अब कोर्ट ने इन दोनों गैंगेस्टरों की सजा की अवधि तय करने के लिए मामले को 13 दिसंबर की तारीख पर लगा दिया है। इस दिन अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) और बचाव पक्ष के वकील सज़ा की गंभीरता और अवधि को लेकर अपने-अपने तर्क पेश करेंगे।

बुधवार को सज़ा सुनाने से पहले कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अदालत ने संबंधित जेल अधीक्षकों से दोनों दोषियों का नॉमिनल रोल मंगवाने का आदेश दिया है। नॉमिनल रोल में कैदी का जेल में आचरण, पहले की सज़ाएं, मुकदमे और जेल में बिताई गई कुल अवधि जैसी जानकारियां होती हैं, जो कोर्ट को सज़ा तय करने में मदद करती हैं।

इस दौरान राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक विजेन्दर सिंह खर्व कोर्ट में मौजूद थे। वहीं, आरोपियों की ओर से अधिवक्ता अनिरुद्ध यादव के प्रॉक्सी काउंसल शरीक मिर्ज़ा, विनीत पेश हुए और दोनों की ओर से पक्ष रखा। कोर्ट ने पाया कि गैंग की पृष्ठभूमि (संदर्भ) सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार, विकास गुलिया उर्फ विकास लगरपुरिया एक संगठित आपराधिक गिरोह का सरगना या प्रमुख सदस्य रहा है।

इस गैंग पर हत्या, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली (रंगदारी) जैसे कई संगीन मामले दर्ज हैं। धीरपाल उर्फ काना को इसी गिरोह का अहम सहयोगी माना जाता है। मकोका के तहत मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन पक्ष ने गैंग की लगातार अवैध गतिविधियों और आपराधिक इतिहास को आधार बनाया था, जिसमें कोर्ट ने अब इन्हें दोषी पाया है।

यह भी पढ़ें- दिल्ली दंगे की सुनवाई में हाईकोर्ट ने पुलिस जांच को ‘खराब’ बताया, दूसरी FIR के आदेश को कर दिया रद
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4610K

Credits

administrator

Credits
467521

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com