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Dehradun : म्यारखेड़ा में छत्रधारी चालदा देवता का रात्रि प्रवास, उमड़ी भक्तों की भीड़

Chikheang 2025-12-12 21:07:16 views 383
  

जौनसार बावर के भूपऊ में आराध्य छत्रधारी चालदा महासू महाराज की प्रवास यात्रा पहुंचने पर मौजूद श्रद्धालु।



संवाद सूत्र, जागरण, साहिया : जौनसार बावर के आराध्य छत्रधारी चालदा महासू महाराज की पालकी गुरुवार को चौथे रात्रि पड़ाव पर म्यारखेड़ा पहुंची। जहां पर चालदा देवता के स्वागत में पुष्प वर्षा की गई। देवदर्शन को आस्था का जनसुमद्र उमड़ा। हर कोई अपने अराध्य के दर्शन को व्याकुल दिखाई दिया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

भूपऊ गांव में रात्रि प्रवास के बाद गुरुवार को चालदा देवता चौथे प्रवास के लिए रवाना हुए। पैदल प्रवास यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु चल रहे हैं। जगह-जगह लोग देवदर्शन को जुटे। छत्रधारी देवता के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान है। भूपऊ गांव से देव पालकी के रवाना होने के क्षणों में सैकड़ों महिलाओं की आंखें नम हो उठीं।

  

श्रद्धालुओं ने फूल, चावल, अखरोट देवता की ओर समर्पित करते हुए महाराज को प्रणाम किया। भूपऊ जाते समय छत्रधारी चालदा महासू महाराज देर रात गबेला स्थित महासू देवता मंदिर व कुकुर्सी महाराज मंदिर परिसर में पहुंचे। जहां दर्शन करने के लिए पहले से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

  

विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान ने छत्रधारी चालदा महासू महाराज की देव पालकी को कंधा देकर सुख-समृद्धि की कामना की। चालदा महासू महाराज अपने चौथे पड़ाव पर खत दसऊ पसगांव के मयार खेड़ा में रात्रि विश्राम (बागड़ी) पर पहुंचे।

वहीं हिमाचल सरकार के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के अनुसार जिला सिरमौर के शिलाई क्षेत्र में पहली बार छत्रधारी चालदा महासू महाराज की प्रवास यात्रा पश्मी गांव स्थित नवनिर्मित मंदिर में विराजमान हो रहे हैं।

  

हिमाचल प्रदेश की सीमा पर महाराज का भव्य स्वागत किया जाएगा। पूरी तैयारियां कर ली गयी हैं। पश्मी गांव में छत्रधारी चालदा देवता का एक साल का प्रवास होगा। जिससे पूरे गिरीपार क्षेत्र में काफी उत्साह और धार्मिक उल्लास का महौल है।

  
प्रवास यात्रा

  • 12 दिसंबर 2025 को सावड़ा में बुरायला जगथान की बागड़ी।
  • 13 दिसंबर 2025 को द्राबिल (हिमाचल प्रदेश) में बागड़ी। सिरमौर में अंतिम पड़ाव।
  • 14 दिसंबर 2025 को पश्मी मंदिर में एक वर्ष के लिए विराजमान।


यह भी पढ़ें- Dehradun: चालदा महासू महाराज की प्रवास यात्रा शुरू, दसऊ से विदा होकर हिमाचल प्रदेश के पश्मी गांव को चले देवता
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