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दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए बड़ा बदलाव, 300 किमी दायरे में नए कोयला आधारित प्लांटों पर रोक का प्रस्ताव

deltin33 2025-12-13 02:07:41 views 1244
  

प्रतीकात्मक तस्वीर।



संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर की सीमा से परे जाकर, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) चार पड़ोसी राज्यों में उद्योगों में कोयले के उपयोग को पूर्णतया खत्म करने के प्रयासों में जुट गया है। आयोग ने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट को भी अवगत करा दिया है। आगामी कुछ महीनों के दौरान चरणबद्ध रूप में इसके परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया

जानकारी के मुताबिक, सीएक्यूएम अब एनसीआर क्षेत्रों से बाहर के उद्योगों पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहता है। इसीलिए 19 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे गए उपायों की एक श्रृंखला में, सीएक्यूएम ने दिल्ली से सटे राज्य गैर-एनसीआर जिलों में उद्योगों में कोयले के उपयोग को समाप्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया है।
वायु प्रदूषण के स्रोतों पर करेंगे \“प्रहार\“

यह अन्य उत्सर्जन स्रोतों के साथ-साथ गैर-एनसीआर क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर भी ध्यान केंद्रित करने की दिशा में एक बड़े बदलाव का संकेत है। अभी तक, एनसीआर क्षेत्रों से परे वायु प्रदूषण के स्रोतों के खिलाफ कार्रवाई पराली जलाने, ईंट भट्टों व थर्मल पावर प्लांटों से होने वाले उत्सर्जन पर केंद्रित रही है।
दिल्ली के पास 24 जिले शामिल

सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराने के बाद सीएक्यूम ने एक कार्यालयी ज्ञापन भी निकाल दिया है। इसके तहत हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब राज्यों के गैर-एनसीआर क्षेत्रों में उद्योगों में ईंधन के रूप में कोयले के उपयोग को समाप्त करने के लिए राज्य सरकारों द्वारा कार्ययोजना तैयार करने और तीन महीने के भीतर सीएक्यूएम को पेश प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। मालूम हो कि दिल्ली के बाहर, एनसीआर में हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के 24 जिले शामिल हैं।
सीएक्यूएम के पिछले निर्देशों के दायरे में नहीं आए

सीएक्यूएम के एक सूत्र ने बताया कि एनसीआर से बाहर के क्षेत्रों में जहां कोयले का उपयोग अभी भी मुख्य ईंधन के रूप में किया जाता है, वहां इस्पात मिलें, फाउंड्री, रिफ्रैक्टरी और सिरेमिक इकाइयां, सीमेंट इकाइयां, कागज और लुगदी मिलें, कपड़ा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और ईंट भट्टे जैसे उद्योग मौजूद हैं। ये उद्योग कोयला, पेट कोक और फर्नेस ऑयल का उपयोग करते हैं और स्वच्छ ईंधन विकल्पों की ओर बढ़ने के संबंध में सीएक्यूएम के पिछले निर्देशों के दायरे में नहीं आए हैं।
संचालकों द्वारा स्वयं बंद कर दिया गया

अगस्त 2024 में एनजीटी में सीएक्यूएम द्वारा दायर एक हलफनामे के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 7,759 ईंधन-आधारित उद्योगों में से 7,449 को अनुमोदित, स्वच्छ ईंधनों में परिवर्तित कर दिया गया है, जबकि शेष 310 को या तो निर्देशों के माध्यम से या संचालकों द्वारा स्वयं बंद कर दिया गया है। प्राकृतिक गैस, बिजली, जैव ईंधन और बायोमास सीएक्यूएम द्वारा अनुमोदित ईंधनों में शामिल हैं।
गैस आधारित संयंत्रों में परिवर्तित करने की संभावना

सीएक्यूएम ने शीर्ष अदालत को अन्य महत्वपूर्ण दीर्घकालिक उपायों के साथ यह भी प्रस्तावित किया है कि दिल्ली से 300 किमी के दायरे में और आवश्यकता पड़ने पर नए थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने पर रोक लगाई जानी चाहिए।

सीएक्यूएम सूत्रों ने बताया कि वह इस मुद्दे पर विद्युत मंत्रालय से चर्चा करेगा, जिसमें कोयला आधारित संयंत्रों को गैस आधारित संयंत्रों में परिवर्तित करने की संभावना भी शामिल है।

मालूम हो कि थर्मल पावर प्लांट सल्फर डाइऑक्साइड और कण पदार्थ प्रदूषण में योगदान करते हैं। दिल्ली के 300 किमी के दायरे में 11 थर्मल पावर प्लांट हैं जिनमें 35 इकाइयां हैं और जिनकी स्थापित क्षमता 13,575 मेगावाट है।

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