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गोरखपुर में वार्निंग फ्लीट के आगे आयी थी बस, नहीं रुका सीएम का काफिला; SSP ने बताया क्यों हटे चौकी प्रभारी

Chikheang 2025-12-13 13:07:02 views 1237
  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। जागरण  



जागरण संवाददाता,गोरखपुर। एयरपोर्ट जाते समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काफिला का आगे कोई वाहन नहीं आया था।असुरन चौराहे पर रूट में बस आ जाने की वजह से वार्निंग फ्लीट क्षणभर के लिए धीमी हुई।समीक्षा में एसएसपी ने इसे सुरक्षा चूक नहीं माना, हालांकि ड्यूटी लापरवाही के चलते असुरन चौकी प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

चार दिसंबर की शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काफिला स्पोर्ट्स कालेज से एयरपोर्ट की ओर लौट रहा था। निर्धारित रूट पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पहले से ही व्यापक बंदोबस्त किए गए थे।असुरन चौराहे पर तीन थानेदार, एक सीओ और दो ट्रैफिक इंस्पेक्टर तैनात थे। इसी बीच असुरन चौराहे के पास अचानक एक बस रूट में आ गई।

बस के प्रवेश से वार्निंग फ्लीट की गति कुछ समय के लिए धीमी हो गई, लेकिन मुख्य फ्लीट बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ती रही।घटना की जानकारी मिलने पर एसएसपी राजकरन नय्यर ने तुरंत मामले की समीक्षा की और सुरक्षा टीम से रिपोर्ट ली।

उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि मुख्यमंत्री का काफिला न रुका और न ही बाधित हुआ, इसलिए इसे सुरक्षा चूक की श्रेणी में नहीं रखा गया है। परंतु, वार्निंग फ्लीट के दौरान प्रोटोकाल के अनुसार रूट को पूर्ण रूप से सुरक्षित रखना अनिवार्य था।समीक्षा में यह पाया गया कि असुरन चौकी स्तर पर तैयारी पर्याप्त नहीं थी। इसके बाद चौकी प्रभारी असुरन को लाइन हाजिर कर दिया गया।

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एसएसपी ने कहा कि ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार की स्थिलता स्वीकार नहीं की जाएगी और यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है कि प्रोटोकाल में कोई ढिलाई न की जाए।इस घटना के संदर्भ में संबंधित सीओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।एसपी ट्रैफिक के विरुद्ध किसी तरह की जांच नहीं चल रही है। एसएसपी ने यह भी बताया कि शाहपुर थानेदार को दोहरे हत्याकांड में लापरवाही के आधार पर हटाया गया है, जिसका इस घटना से कोई संबंध नहीं है।

क्या है वार्निंग फ्लीट :
वार्निंग फ्लीट आमतौर पर उन गाड़ियों का समूह होता है जो मुख्य वीवीआइपी वाहन के एक से दो मिनट पहले रूट पर भेजी जाती हैं। इसका कार्य रूट पर अवरोध, संदिग्ध वाहनों और अनियंत्रित भीड़ को हटाना।यातायात को पूरी तरह रोककर कारिडोर बनाने के साथ ही सुरक्षा में तैनात पुलिसवालों को बताना कि वीवीआइपी आने वाले हैं।वार्निंग फ्लीट अगर धीमी पड़ती है तो यह माना जाता है कि प्रोटोकाल के निर्धारित स्तर पर कहीं न कहीं समन्वय कमजोर पड़ा है।
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