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Weather Update: मानसूनी वर्षा का नहीं थम रहा सिलसिला, शरद पूर्णिमा का चांद पर रह सकता बादलों का साया

LHC0088 2025-10-6 07:06:13 views 1231
  शरद पूर्णिमा का चांद बादल की वजह से नहीं दिख सकता है।





जागरण संवाददाता, कानपुर। मानसून वापसी का सिस्टम अभी तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नहीं बन पाया और ओडिशा की ओर से आ रही नम हवा से बादलों के आने और वर्षा का सिलसिला भी थम नहीं रहा है। सोमवार को शरदपूर्णिमा पर भी बादल छाए रहने की संभावना है। रविवार को उत्तर-पश्चिमी हवा का बहना शुरू हुआ है। इसके बावजूद सोमवार की रात में आसमान साफ रहने के आसार कम हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

मानसून वर्षा की विदाई का समय 30 सितंबर माना गया है। इसके बावजूद अक्टूबर के पहले सप्ताह में भी वर्षा हो रही है। मौसम विशेषज्ञ भी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि इसे पोस्ट मानसून वर्षा माना जाए या मानसून की वर्षा कहा जाए। ओडिशा से बने कम हवा का दबाव पिछले सप्ताह में घूमकर कानपुर की ओर आया तो इसके साथ ही मानसून के बादल भी चले आए। इससे पिछले सप्ताह में उम्मीद से ज्यादा पानी बरस गया है।



मौसम विशेषज्ञ डा. एसएन सुनील पांडेय के अनुसार अक्टूबर का महीना संक्रमणकालीन है। इस महीने में उत्तर भारत के अधिकांश भागों में मानसून की वापसी शुरू हो जाती है और उत्तर-पूर्वी हवा बहने लगती है। इससे मानसून हवा लौट जाती है और आसमान साफ होने लगता है। रविवार को उत्तर-पश्चिम हवा की औसत गति 8.2 किमी प्रति घंटा रही है। हवा की गति कम होने से वर्षा वाले बादलों की आवाजाही बनी है।

सोमवार दोपहर बाद से बादल आने के आसार बन रहे हैं। इससे सोमवार की रात और मंगलवार को हल्की वर्षा व बूंदाबांदी की संभावना है। अगले चार से पांच दिन में मानसून वापसी के संकेत मिल सकते हैं। रविवार को शहर में अधिकतम तापमान 34.3 और न्यूनतम तापमान 23.0 डिग्री रहा है। चकेरी एयरपोर्ट पर अधिकतम तापमान 36.2 और न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री रहा है। धूप निकलने से दिन के अधिकतम तापमान में वृद्धि हुई है। सोमवार को भी तापमान अधिक रहेगा लेकिन मंगलवार को मौसम बदल जाएगा।


मानसून वापसी के लिए जरूरी बातें

1-क्षेत्र में लगातार 5 दिनों तक वर्षा गतिविधि बंद रहे।

2-निचले क्षोभमंडल में प्रतिचक्रवात की स्थापना होनी चाहिए।

3- नमी में कमी और शुष्क मौसम का व्यापक असर ।
आज मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा सोमवार को मनाई जाएगी। लोग पूजन कर धन-समृद्धि की कामना करेंगे। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन जिस चीज पर चंद्रमा की किरणें पड़ती है उसमें अमृत का संचार होता है। इसलिए घरों में खीर बनाकर छतों पर सुरक्षित तरीके से रखी जाएगी। दूसरे दिन सभी लोग प्रसाद के रूप में खीर खाते हैं। ज्योतिष सेवा संस्थान के अध्यक्ष आचार्य पवन तिवारी ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात में खीर बनाकर पूरी रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखें। सुबह उठकर यह खीर प्रसाद के रूप में खाई जाती है। चंद्रमा की रोशनी में रखी गई खीर खाने से शरीर से रोग समाप्त होते हैं।



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