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कड़वा सच! चंडीगढ़ में दूध-पनीर का हर तीसरा सैंपल फेल, किडनी-लिवर फेलियर और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा

LHC0088 2025-12-15 18:07:43 views 1080
  

बीते तीन वित्तीय वर्षों में शहर में लिए गए सैंपलों में लगातार मिलावट सामने आई है।



मोहित पांडेय, चंडीगढ़। शहरवासियों की थाली में परोसे जा रहे दूध और पनीर की गुणवत्ता अब गंभीर सवालों के घेरे में है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथाॅरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि बीते तीन वर्षों में दूध और दुग्ध उत्पाद का हर तीसरा सैंपल मानकों पर फेल पाया गया है।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

आहार विशेषज्ञों के अनुसार, दूध और दुग्ध उत्पादों में यूरिया, डिटर्जेंट, स्टार्च, फार्मेलिन, और सिंथेटिक पदार्थों की मिलावट से किडनी, लिवर और कैंसर जैसी बीमारियां का खतरा बढ़ जाता है।

एफएसएसएआई की रिपोर्ट के आंकड़े न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र की कमजोरियों को भी उजागर करते हैं। वहीं, स्वास्थ्य और फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई अभी भी अधूरी नजर आती है। सप्लाई चेन में खामियां और बाहरी राज्यों से आने वाले उत्पादों की मिलावट ने चेतावनी की घंटी बजा दी है।

एफएसएसएआई की रिपोर्ट के मुताबिक बीते तीन वित्तीय वर्षों में शहर में लिए गए सैंपलों में लगातार मिलावट सामने आई है। एफएसएसएआई के मानकों के अनुसार पनीर में स्टार्च और सुक्रोज जैसी मिलावट सबसे अधिक पाई जा रही है। हालांकि हरियाणा और पंजाब के मुकाबले स्थिति कुछ बेहतर है, लेकिन बढ़ता फेल प्रतिशत सतर्कता की मांग करता है।

वर्ष 2022-23 में चंडीगढ़ से 23 सैंपल लिए गए, जिनमें 6 फेल पाए गए। 2023-24 में 40 सैंपलों में से 17 गैर-मानक निकले, जबकि 2024-25 में अब तक 36 सैंपलों में से 19 फेल हो चुके हैं। यानी लगभग हर तीसरा सैंपल मानकों पर खरा नहीं उतर रहा। पड़ोसी राज्यों से तुलना करने पर हरियाणा में तीन साल में 1451 सैंपलों में से 529 और पंजाब में 1915 सैंपलों में से 902 सैंपल फेल पाए गए।

पंजाब में पनीर में मिलावट सबसे अधिक पाई गई। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बाजार वाले चंडीगढ़ में भी फेल सैंपलों का अनुपात चिंता का विषय है। यह सप्लाई चेन में खामियों का संकेत देता है और बाहरी राज्यों से आने वाले दूध-पनीर पर सख्त निगरानी जरूरी है।
लैब में करवा सकते हैं जांच

दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच के लिए अब फूड सेफ्टी विभाग की लैब में सैंपल जांच की सुविधा उपलब्ध है। कोई भी नागरिक कुछ रुपये देकर जांच करवा सकता है। विभाग के अनुसार, सैंपल में मिलावट पाए जाने पर संबंधित रिपोर्ट दर्ज की जाती है और दोषियों पर कार्रवाई होती है।
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