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Patna News: 14 लाख रिश्वत लेते पकड़े गए पथ निर्माण विभाग के ईओ समेत दो को चार साल की सजा

LHC0088 2025-12-16 00:07:46 views 1255
  



जागरण संवाददाता, पटना। चौदह लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के मामले में निगरानी के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम की अदालत ने सोमवार को पथ निर्माण विभाग के एक कार्यपालक अभियंता सहित दो अभियुक्तों को चार वर्षों तक के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

अदालत ने अभियुक्तों पर पांच लाख रुपये तक का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। तत्कालीन इंजीनियर ने पटना में 40 करोड़ से बनने वाली सड़क की योजना में राशि का एक प्रतिशत रिश्वत मांगा था। निगरानी ने छापेमारी में इनके घर से दो करोड़ 36 लाख 23 हजार रुपए नगद भी बरादम किया था।

मामले के अभियुक्त पथ निर्माण विभाग में पटना पश्चिम प्रमंडल के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सुरेश कुमार सिंह और रोकड़िया शशि भूषण कुमार हैं। अदालत ने अभियुक्तों को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया था।

अदालत ने अभियुक्त कार्यपालक अभियंता को चार वर्षों के सश्रम कारावास की सजा और पांच लाख रुपये आर्थिक जुर्माना लगाया है। रोकड़िया को चार वर्षों के सश्रम कारावास की सजा और तीन लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना किया है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर दोनों अभियुक्तों को एक-एक माह अतिरिक्त जेल में रहना होगा।

मामले के विशेष लोक अभियोजक प्रभारी निगरानी ट्रैप केसेस किशोर कुमार सिंह ने बताया कि मामला वर्ष 2019 का है। एक कंपनी को पटना में सड़क के निर्माण का 40 करोड़ रुपए का ठेका मिला था। मामले के अभियुक्त कार्यपालक अभियंता एक प्रतिशत के हिसाब से 40 लाख रुपये की रिश्वत की मांग कर रहे थे।

एग्रीमेंट करने में टाल-मटोल कर रहे थे। वरीय अधिकारियों को शिकायत करने पर एग्रीमेंट तैयार हुआ। बाद में सात किलोमीटर सड़क का निर्माण करने के बाद शिकायतकर्ता ने सिक्योर्ड एडवांस की मांग किया। तब कार्यपालक अभियंता ने 40 लाख रुपये के रिश्वत की मांग किया।

बाद में 32 लाख रुपए की मांग करने लगे। आठ जून 2019 को निगरानी के अधिकारियों ने कार्यपालक अभियंता के पटेल नगर स्थित आवास पर दोनों अभियुक्तों को 14 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। दोषी कार्यपालक अभियंता के आवास की तलाशी में दो करोड़ 36 लाख 23 हजार रुपये नगद बरामद हुए थे।

इसके अलावा लाखों रुपयों के निवेश और जमा राशि के भी कागजात बरामद हुए थे। इस संबंध में कार्यपालक अभियंता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का एक अलग मुकदमा किया गया था। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से तेरह लोगों ने गवाही दी है।
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