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बढ़ी मधुमेहारी की मांग, बढ़ाना होगा उत्पादन; आयुष विश्वविद्यालय की फार्मेसी में हो रहा तैयार

Chikheang 2025-12-18 17:36:57 views 1258
  

आयुष विश्वविद्यालय में हो रही मधुमेहारी की पैकेजिंग। जागरण  



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। आयुष विश्वविद्यालय में निर्मित आयुर्वेदिक औषधि मधुमेहारी की मांग लगातार बढ़ रही है। कुलपति डा के रामचंद्र रेड्डी के शोध पर आधारित यह औषधि 11 औषधीय द्रव्यों के मिश्रण से तैयार की जाती है, जिससे शुगर रोगियों को व्यापक लाभ मिल रहा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से उपचार करा चुके अनेक रोगी अब आयुष विश्वविद्यालय की ओपीडी में पहुंचकर मधुमेहारी प्राप्त कर रहे हैं। प्रतिदिन तीन से चार सौ रोगी इस औषधि का लाभ ले रहे हैं। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए इसके उत्पादन को और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

आयुष विश्वविद्यालय के चिकित्सकों ने बताया कि मधुमेहारी के निर्माण में आम्रस्थि मज्जा, गुड़मार, जामुन की गुठली, नीम बीज, हरितकी बीज, सौंफ, हरिद्रा, आम्र गुठली, बबूल की फली, विजयसार और करेला का प्रयोग किया जाता है। इन सभी को निर्धारित अनुपात में पीसकर औषधि तैयार की जाती है।

सितंबर में इसका उत्पादन शुरू किया गया था। पहले चरण में लगभग 60 किलोग्राम मधुमेहारी का निर्माण किया गया। इसके लाभ सामने आने के बाद मांग में वृद्धि हुई, जिसके बाद लगभग आठ क्विंटल उत्पादन किया गया। प्रारंभ में यह औषधि पुड़िया के रूप में वितरित की जाती थी, लेकिन अब विश्वविद्यालय में स्वचालित मशीनों के माध्यम से इसकी आकर्षक पैकिंग की जा रही है। पैकेट पर निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि तथा प्रयुक्त औषधीय पौधों के भागों का स्पष्ट विवरण अंकित किया जा रहा है।

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आयुर्वेद चिकित्सक डा. रामाकांत द्विवेदी ने बताया कि आयुष विश्वविद्यालय की फार्मेसी में तैयार मधुमेहारी से रक्त शर्करा स्तर को नियंत्रित करने में सहायता मिल रही है। यह आयुर्वेदिक औषधि मधुमेह से जुड़ी जटिलताओं जैसे हृदय रोग, गुर्दा संबंधी विकार और दृष्टि समस्याओं में भी सहायक सिद्ध हो रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में लोग मधुमेह से पीड़ित हैं, ऐसे में यह औषधि सस्ती, सुलभ और उपयोगी विकल्प के रूप में सामने आ रही है।
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