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कनाडा के अस्पतालों में पड़ा डॉक्टरों का आकाल, इमरजेंसी में भी मरीज कर रहे 24 घंटे तक का इंतजार; क्या है माजरा?

cy520520 2025-12-29 18:35:57 views 1241
  

कनाडा की चिकित्सा व्यवस्था पर उठे सवाल। फाइल फोटो



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कनाडा में भारतीय मूल के 44 वर्षीय व्यक्ति प्रशांत श्रीकुमार की मौत हो गई। इमरजेंसी में 8 घंटे के इंतजार के बाद भी उसका इलाज नहीं हो सका, जिसके कारण प्रशांत ने अस्पताल में भी दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद कनाडा में चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

कनाडा के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी देखने को मिल रही है। देश में प्राथमिक इलाज और स्पेशलिस्ट केयर के लिए भी घंटों लाइन लगाने की नौबत आ गई है। कुछ आंकड़ों के अनुसार, कनाडा में प्रति 1000 लोगों पर सिर्फ 2.8 डॉक्टर ही मौजूद हैं।
कैसे हुई प्रशांत की मौत?

22 दिसंबर को प्रशांत श्रीकुमार की मौत दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई थी। प्रशांत के सीने में दर्द होने के बाद उन्हें एडमोंटन के ग्रे नन्स कम्युनिटी अस्पताल में भर्ती किया गया। अस्पताल में उन्हें वेटिंग रूम में रखा गया और दर्द से निजात दिलाने के लिए उन्हें टाइलेनोल का डोज दे दिया गया।

परिवार के अनुसार, तकरीबन 8 घंटे बाद प्रशांत का नंबर आया। इलाज शुरू होते ही प्रशांत ने दम तोड़ दिया। नर्स ने उन्हें उठाने की बहुत कोशिश की, लेकिन दिल का दौरा पड़ने से प्रशांत की मौत हो गई। प्रशांत के 3 बच्चे और पत्नी हैं, जो अब बेसहारा हो गए हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े?

प्रशांत की मौत ने एक बार फिर कनाडा की चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल दी है। अस्पतालों के इमरजेंसी रूम में लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। आपात स्थिति में पहले 60 मिनट किसी भी मरीज के लिए \“गोल्डन आवर\“ की तरह गिने जाते हैं। ऐसे में समय पर इलाज न मिलने पर उनकी जान जाने का भी खतरा रहता है।

  • कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन की एक रिपोर्ट के अनुसार,
  • कनाडा में हर 5 में से 1 व्यक्ति को प्राथमिक इलाज नहीं मिल पाता है।
  • 36.9 प्रतिशत लोगों को ही 24 घंटे में अर्जेंट अपॉइंटमेंट मिलती है।
  • 22.8 प्रतिशत लोगों को अर्जेंट अपॉइंटमेंट के लिए 2 दिन से लेकर 1 हफ्ते तक का इंतजार करना पड़ता है।

नर्स-डॉक्टरों की कमी

कनाडा सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, इस देश में सिर्फ 23,000 फैमिली डॉक्टर्स हैं। कनाडा की राजधानी ओटावा में ही 28,000 रजिस्टर्ड नर्स, 14,000 लाइसेंस प्राप्त नर्स और 2,700 प्रेक्टिस करने वाली नर्सों की जरूरत है। इसके अलावा हजारों डॉक्टरों के पद भी खाली पड़े हैं।
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