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मुजफ्फरपुर PNB फ्रॉड में ED एक्शन: 83 लाख जब्त, बैंककर्मी नीतेश समेत आरोपियों की संपत्ति खंगाली जा रही

cy520520 2025-12-31 03:56:02 views 474
  

सांकेतिक तस्वीर



संजीव कुमार, मुजफ्फरपुर। पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) के ग्राहकों के खाते से करीब पांच करोड़ रुपये से अधिक के फ्रॉड मामले में पुलिस की जांच के बाद अब ईडी ने तफ्तीश के साथ कार्रवाई तेज कर दी है। दूसरी ओर मामले में पुलिस की ओर से पूर्व में जेल भेजे गए बैंककर्मी नीतेश कुमार समेत छह आरोपितों की भी संपत्ति को खंगाला जा रहा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

अधिकारियों की मानें तो गैरकानूनी ढंग से अर्जित संपत्ति का पता लगाया जा रहा है। इसके बाद जल्द ही गैरकानूनी ढंग से अर्जित संपत्ति को जब्त करने की कवायद की जाएगी। इस दिशा में बैंककर्मी समेत सभी आरोपितों की संपत्ति को लेकर अंचल व निबंधन कार्यालय से संपर्क कर विवरणी जुटाई जा रही है।

इस मामले में पिछले सप्ताह मुजफ्फरपुर में चार स्थानों पर ईडी की टीम ने छापेमारी की थी। इसमें 83 लाख रुपये जब्त किए गए थे। जांच में पता चला कि फ्राड के खेल में कोलकाता व बैंगलरू के करीब एक दर्जन हवाला कारोबारी भी शामिल है। फ्रॉड की राशि इन सभी के खाते में ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद विभिन्न माध्यमों से इन सभी के पास रुपये आते थे।

पुलिस की जांच में भी बेंगलुरू व कोलकाता के कई हवाला कारोबारियों के नाम सामने आए थे। पूर्व में ईडी की टीम कई बार नगर थाने पहुंचकर केस के जांच अधिकारी से मिलकर कई बिंदुओं पर जानकारी ली थी। दोनों शहरों में ईडी की टीम कार्रवाई में जुटी है।

विदित हो कि करीब चार वर्ष पूर्व पीएनबी से करोड़ों रुपये के साइबर फ्राड का मामला तब सामने आया था, जब बीएसएनएल के रिटायर्ड कर्मचारी के बैंक खाते से जून 2021 में चार बार में पांच-पांच लाख की निकासी कर ली गई थी। अगले दिन भी दो लाख 40 हजार की निकासी की गई। इस तरह से उनके खाते से 22 लाख 40 हजार उड़ाए गए थे।

मामले में नगर थाने में प्राथमिकी कराई गई थी। पुलिस ने इसकी जांच शुरू की। इसी में पुलिस ने बैंक खाते से राशि उड़ाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। जांच में पता चला कि गोबरसही पीएनबी शाखा में तैनात कर्मी नीतेश कुमार सिंह ग्राहकों का डिटेल्स निकालकर गिरोह के बदमाशों तक पहुंचाता था।

इसके बाद साइबर फ्राड हाई टेक्नोलाजी का इस्तेमाल कर ग्राहक के मोबाइल का नेटवर्क गायब कर देते थे। फिर बैंक में दिए गए कागजात की छायाप्रति लेकर उनके ही नाम से दूसरा सिम निकालकर पोर्ट करा लेते। इसके बाद बैंक के मोबाइल एप के जरिए खाता स्थानांतरित करने का खेल करते थे। राशि हवाला कारोबारियों के खाते में डाल दी जाती थी।
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