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Cricket Tale: 100 मील की रफ्तार... शोएब अख्तर का कहर; क्रिकेट इतिहास की सबसे तेज गेंदों का इन 2 बल्लेबाजों ने किया सामना

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शोएब अख्तर ने फेंकी है दुनिया की सबसे तेज गेंद।  



स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। क्रिकेट का मैदान हमेशा से सिर्फ बल्ले-गेंद का युद्ध नहीं रहा। कभी-कभी वो खिलाड़ियों के सपने का रण क्षेत्र बन जाता है। बल्लेबाज, बल्ले से करिश्माई रिकॉर्ड बनाने का सपना लेकर उतरता है तो वहीं गेंदबाज भी कई तरह के सपने लेकर। एक समय था जब वेस्टइंडीज के गेंदबाजों के आगे बल्लेबाजों के पैर कांपते थे। फिर बल्लेबाजों ने अपने जूझारू पन से तेज गेंदबाजी का खौफ समाप्त किया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

उस दौर के बाद हर तेज गेंदबाज का सपना बन गया था 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकने का। हर तेज गेंदबाज के सीने में ये छोटा-सा, जिद्दी सपना पलता था। \“बस एक बार... सिर्फ एक बार...,\“ लेकिन ज्यादातर के लिए ये सपना बस एक अधूरी कहानी बनकर रह जाता। फिर आया एक शख्स, जिसने इस अधूरी कहानी का अंत कर दिया और नया किस्सा बुन गया। नाम है- शोएब अख्तर, जिसने एक नहीं बल्कि दो बार 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी। हालांकि, एक गेंद को आधिकारिक माना गया जबकि दूसरी को नहीं।

यहीं एक सवाल जन्म लेता है कि आखिर दुनिया की सबसे तेज गेंदों का सामना करने वाले क्रिकेट इतिहास के वो दो बल्लेबाज कौन से थे। आई जानते हैं उन दो गेंदों की कहानी।
पहली बार न्यूजीलैंड का बल्लेबाज

27 अप्रैल 2002। लाहौर में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे मैच के दौरान सूरज ढल रहा था। स्टेडियम में हल्की-हल्की ठंडक। शोएब रन-अप पर खड़े थे। आंखों में वही जुनून, जो सालों से जल रहा था। पहली गेंद। फिर दूसरी। और फिर वो गेंद आई...161.0 किलोमीटर प्रति घंटा। 100 मील प्रति घंटा। मैदान पर सन्नाटा छा गया। फिर तालियां गूंजीं। फिर चीखें। फिर पूरा पाकिस्तान उछल पड़ा। उस गेंद का सामना करने वाला बल्लेबाज है न्यूजीलैंड के- क्रेग मैकमिलन।

न्यूजीलैंड का वो मजबूत कंधों वाला बल्लेबाज, जिसने शायद ही कभी सोचा होगा कि वो क्रिकेट इतिहास का एक हिस्सा बन जाएगा। गेंद इतनी तेज थी कि मैकमिलन ने बाद में हंसते हुए कहा था- \“मैंने तो बस सोचा था कि ये गेंद ज्यादा दूर तक नहीं जाएगी..., पता नहीं था कि वो इतनी जल्दी मेरे पास पहुंच जाएगी!\“ लेकिन पाकिस्तान की ये खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी। आईसीसी ने इस रिकॉर्ड को ठुकरा दिया। स्पीड गन पर सवाल उठाए गए। स्पॉन्सर का नाम लिया गया।
शोएब अख्तर ने दिया करारा जवाब

कहा गया- \“ये आधिकारिक नहीं है।\“ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने बयान दिया। मीडिया में बहस छिड़ गई। लेकिन शोएब चुप रहे। बिल्कुल चुप। उनकी चुप्पी में एक तूफान पनप रहा था और तकदीर ने अपना खेल खेला। एक साल बाद। 22 फरवरी 2003 का दिन, मौका क्रिकेट वर्ल्ड कप का। साउथ अफ्रीका के केपटाउन शहर के न्यूलैंड्स का ग्राउंड। इंग्लैंड के खिलाफ पाकिस्तान का मुकाबला। शोएब फिर रन-अप पर थे। इस बार आंखों में सिर्फ जुनून नहीं था... बदला भी था।

सामने इंग्लैंड का बल्लेबाज निक नाइट और फिर वो गेंद आई। 161.3 किमी/घंटा। 100.23 मील प्रति घंटा... शोएब ने फिर से अपने इतिहास को दोहरा दिया था। इस बार आईसीसी के पास कोई बहाना नहीं बचा। कोई स्पीड गन की बहस नहीं। कोई स्पॉन्सर का नाम नहीं। शोएब ने गेंद फेंकते ही दोनों हाथ ऊपर किए। दो उंगलियां दिखाईं। दो बार। ये जवाब था, आईसीसी को। दुनिया को।
सपने सच होते हैं

उस दिन मैदान पर सिर्फ एक गेंदबाज नहीं खड़ा था। एक सपना खड़ा था। जो हारा नहीं। जो झुका नहीं। जो दो बार 100 मील की दीवार तोड़कर आगे निकल आया। आज भी जब तेज गेंदबाजों की बात होती है, लोग पहले शोएब अख्तर का नाम लेते हैं। न सिर्फ इसलिए कि वो सबसे तेज थे। बल्कि इसलिए कि उन्होंने साबित कर दिया था- \“सपने सच होते हैं। बशर्ते तुम उन्हें सच होने के लायक जुनून से जीने लगो।\“

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