प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)
राज्य ब्यूरो, पटना। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अपने अधिकारियों को संविधान का पाठ पढ़ाते हुए कहा है कि वे समान परिस्थिति वाले मामलों में समान निर्णय सुनिश्चित करें।
विभाग के अपर मुख्य सचिव सीके अनिल ने गुरुवार को जारी पत्र में कहा है कि सभी राजस्व पदाधिकारी संविधान के अनुच्छेद-14 और समता के सिद्धांत का अनिवार्य रूप से पालन करेंगे।
पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार के सात निश्चय तीन के लक्ष्य सबका सम्मान–जीवन आसान को साकार करने के लिए राजस्व प्रशासन में मनमानी पर रोक लगाना आवश्यक है।
भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई मामलों में विधिक ज्ञान और प्रशिक्षण के अभाव में समान मामलों में भिन्न-भिन्न आदेश पारित किए जा रहे हैं। यह न केवल संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन है, बल्कि लोक विश्वास को भी कमजोर करता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, अतिक्रमण हटाने, जमाबंदी कायम करने, पट्टा देयता तथा सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में एकरूप, निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई अपेक्षित है। समाहर्ताओं को इन मामलों में कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
पहचान देखकर आदेश देना, दबाव में भिन्न व्यवहार करना, समान मामलों में अलग-अलग आदेश पारित करना और चयनात्मक सख्ती जैसे कृत्य पूर्णतः निषिद्ध हैं। ऐसे कार्य न केवल विधिक शासन के विरुद्ध हैं, बल्कि राजस्व प्रशासन की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
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राजस्व प्रशासन में समानता, पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, जमाबंदी, अतिक्रमण और सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में सभी अधिकारियों को स्पष्ट, सकारण और विधिसम्मत आदेश पारित करने होंगे। मैं सभी समाहर्ता एवं राजस्व पदाधिकारियों से अपेक्षा करता हूं कि वे इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। -
विजय कुमार सिन्हा, उप मुख्यमंत्री सह भूमि सुधार मंत्री। |