बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले जारी (फोटो- एक्स)
डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय पर लक्षित हमलों की श्रृंखला थमने का नाम नहीं ले रही है।घटना में चोरी के संदेह में भीड़ के पीछा करने से बचने के लिए एक 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार ने नहर में छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार दोपहर को भंडारपुर गांव निवासी मिथुन का शव बरामद किया।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब देश 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों की तैयारी कर रहा है। शेख हसीना सरकार के 2024 में गिरने के बाद अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेजी आई है।
हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (ओइक्य परिषद) ने आज जारी बयान में दिसंबर महीने में कम से कम 51 लक्षित घटनाओं की जानकारी दी, जिनमें 10 हत्याएं, लूटपाट, आगजनी, बलात्कार के प्रयास और घर-मंदिरों पर कब्जे के मामले शामिल हैं। परिषद ने चिंता जताई कि ये हमले चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों को डराने की सुनियोजित साजिश का हिस्सा लगते हैं।
पिछले कुछ दिनों में हुई अन्य घटनाओं में
- 5 जनवरी को जेस्सोर जिले में हिंदू व्यापारी और समाचार पत्र के कार्यवाहक संपादक राणा कांति बैरागी की गोली मारकर हत्या।
- उसी दिन नरसिंगदी में किराने की दुकान मालिक मोनी चक्रवर्ती की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या।
- 3 जनवरी को शरियतपुर जिले में खोकोन चंद्र दास पर बेरहम हमला कर आग लगाने से मौत।
इससे पहले दिसंबर में राजबारी में अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या और मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीटकर हत्या कर शव जलाने की घटनाएं सामने आई थीं।
मानवाधिकार पर्यवेक्षकों का कहना है कि ये घटनाएं राज्य की कमजोर संस्थाओं और सांप्रदायिक तनाव के खतरनाक मिश्रण को दर्शाती हैं। अंतरिम सरकार ने हमलों की निंदा की है और जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय में डर का माहौल बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई है।
परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है, “बांग्लादेश ने पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल देखी है, लेकिन वर्तमान स्थिति में संस्थागत कमजोरी और सांप्रदायिक चिंताएं बेहद खतरनाक हैं।“ विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव नजदीक आने के साथ हिंसा और बढ़ सकती है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। |