जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। कौशांबी थाना क्षेत्र में भूमि के फर्जीवाड़े के मामले में न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या सात ने अभियुक्त देवेंद्र कुमार की अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। आरोपित पर अन्य लोगाें के साथ मिलकर जीडीए की भूमि को बेचने का आरोप है।
कौशांबी में अभियुक्त देवेंद्र कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 471, 468, 467 व 420 के तहत मामला पंजीकृत है। अभियोजन के मुताबिक गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की वैशाली आवासीय योजना के लिए अधिगृहीत ग्राम हसनपुर भोवापुर की भूमि को कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बेचने का आरोप है।
इसमें खसरा संख्या-97, 98, 99 और 100 से संबंधित भूमि का उल्लेख है। जिसे पहले ही विकास प्राधिकरण द्वारा अधिगृहीत किया जा चुका था। प्राधिकरण के अवर अभियंता वीरेंद्र कुमार पांडेय द्वारा दी गई तहरीर में बताया गया कि अभियुक्तगण ने आपसी साठगांठ कर भोले-भाले लोगों को भ्रमित किया और अवैध रूप से प्लाट काटकर अनाधिकृत कॉलोनियों का निर्माण कराया।
मामले की शिकायतें मिलने के बाद जांच की गई। इस मामले आरोपित देवेंद्र कुमार की ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई। अभियुक्त की ओर से दलील दी गई कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
विवादित भूमि उसके परिवार की है। इसे लेकर वाद लंबित हैं। वहीं, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने आरोपों को गंभीर बताते हुए अग्रिम जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली के अवलोकन के बाद न्यायालय ने माना कि मामले की विवेचना अभी प्रचलित है।
अभियुक्त की भूमिका प्रथम दृष्टया गंभीर है। ऐसे में अग्रिम जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं। के न्यायाधीश डॉ. दिनेश चंद्र शुक्ला की अदालत ने देवेंद्र कुमार की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। |