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प्रशासनिक लापरवाही: 5500 पेड़ों पर चला प्रधान का ट्रैक्टर, 23 साल की मेहनत मिट्टी में मिली, 93 हजार का जुर्माना भी नहीं भरा

Chikheang Yesterday 00:26 views 136
  

प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



जागरण संवाददाता, पीलीभीत। वन विभाग की ओर से 23 वर्ष पहले पहले पांच हेक्टेयर में रोपे गए करीब 5500 पौधों को ग्राम प्रधान की ओर से उखड़वा दिया गया। इतनी लंबी अवधि में वे पौधे बढ़कर पेड़ बन गए होंगे, लेकिन उनको ट्रैक्टर से जोतकर समतल कर दिया। उन पेड़ों की लकड़ियां कहां गईं, उन पेड़ों को काटने या उखाड़ने की अनुमति किसने दी।

इन सवालों के जवाब न तो जांच टीम ने जानने की कोशिश की और न ही जांच रिपोर्ट में इसको उल्लेखित किया गया। हां, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ ग्राम प्रधान पर करीब 93 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया, जो शायद ही भरा गया हो। बिलसंडा ब्लाक की ग्राम पंचायत करेली के निवासी कृष्ण कुमार शर्मा ने 12 सितंबर 2025 को दिए गए शिकायती पत्र की जांच की गई।

जांच एसडीएम बीसलपुर, जिला पंचायत राज अधिकारी, ग्राम प्रधान करेली, सचिव ग्राम पंचायत करेली, थानाध्यक्ष करेली और सिमरौली निवासी दलजीत सिंह के साथ ही शिकायतकर्ता को डीएफओ कार्यालय में 28 नवंबर को बुलाया गया। वहां स्थलीय निरीक्षण करने का तय किया गया।

इसके बाद उप प्रभागीय वनाधिकारी पीलीभीत, क्षेत्रीय वनाधिकारी बीसलपुर और ग्राम प्रधान करेली की उपस्थित में जांच की गई तो पता चला कि ग्राम समाज की भूमि पर वन विभाग की ओर से वर्ष 2002 में पांच हेक्टेयर सरकारी भूमि में रोपित किए गए 5500 पौधों को रोपित किया।

इन पौधों को उखाड़कर फेंक दिया गया। इसके बाद डीएफओ सामाजिकी वानिकी ने पौधों को रोपित करने में खर्च होने वाली सरकारी धनराशि 93,407 रुपये को राजकीय कोष में जमा करने का आदेश दिया। यह आदेश 23 दिसंबर को जारी किया गया, लेकिन अब तक धनराशि जमा की गई या नहीं, इस बारे में भी अधिकारियों को पता नहीं है।

अब हैरानी यह है कि गया था। ग्राम प्रधान ने उखाड़ दिए। इस मामले की शिकायत की गई, जिसकी जांच में तथ्य ही पाए गए। को जमा करने का आदेश ग्राम प्रधान को दिया, लेकिन तय अवधि 15 दिन गुजरने के बावजूद धनराशि जमा नहीं की गई।

  


पांच हेक्टेयर सरकारी भूमि में रोपित हुए 5500 पौधों को उखाड़ने के मामले में 93,407 रुपये जुर्माना लगाया गया। अब तक जमा किया गया या नहीं, इसका अपडेट नहीं मिला। शासकीय कोष में धनराशि जमा न करने पर कार्रवाई की जाएगी।

- भरत कुमार डीके, डीएफओ सामाजिकी वानिकी





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