पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर वाराणसी में बसाई गई थी टेंट सिट, एनजीटी (सांकेतिक तस्वीर)
पीटीआई, नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने गुरुवार को कहा कि वाराणसी में गंगा नदी के किनारे 2023 में टेंट सिटी का निर्माण पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए किया गया था। एनजीटी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कहा गया था कि टेंट सिटी आवश्यक मंजूरी के बिना स्थापित की गई थी और यह नदी को प्रदूषित कर रही है तथा वनस्पतियों और जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचा रही है।
एनजीटी के अध्यक्ष प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने कहा, हम पाते हैं कि मेसर्स प्रवेग कम्युनिकेशंस इंडिया लिमिटेड और मेसर्स निरान टेंट सिटी द्वारा स्थापित और संचालित टेंट सिटी पर्यावरण मानदंडों और गंगा नदी (पुनरोद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण के आदेश का उल्लंघन है।
पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने नवंबर 2023 में पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करते हुए टेंट सिटी चलाने के लिए प्रतिवादियों पर लगभग 17 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। ट्रिब्यूनल ने यूपीपीसीबी और उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण विभाग को तीन महीने के भीतर जुर्माना वसूलने का निर्देश दिया।
साथ ही, राज्य सरकार के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि गंगा नदी या उसकी सहायक नदियों के किनारे किसी भी प्रकार की टेंट सिटी स्थापित न की जाए।वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने शहर के विकास के लिए मेसर्स प्रवेग कम्युनिकेशंस और मेसर्स निरान टेंट सिटी के साथ एक समझौता किया था।
इसके तहत 2023 में चेत ¨सह घाट के सामने टेंट सिटी बसाई गई थी। अधिवक्ता सौरभ तिवारी के जरिये याचिकाकर्ता द्वारा मामला उठाने के बाद एनजीटी ने आरोपों की जांच के लिए मार्च 2023 में सात सदस्यीय समिति का गठन किया। याचिकाकर्ता ने टेंट सिटी बसाने में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। |
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