आवारा कुत्तों की फाइल फोटो।
निहाल सिंह, नई दिल्ली। आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी एमसीडी अभी तक समाधान तक नहीं पहुंच पाया है। समाधान के नाम पर एमसीडी कछुआ चाल रहा है। यही वजह है कि लोग आवारा कुत्तों के काटने के शिकार हो रहे हैं।
द्वारका सेक्टर 19 में 65 वर्षीय बुजुर्ग को कुत्तों ने नोच कर मार डाला, लेकिन लोगों को कुत्तों से बचाने के लिए सिर्फ फीडिंग प्वाइंट और नोडल अधिकारी बनाकर खाना पूरी कर ली है। जबकि खतरनाक कुत्तों को रखने के लिए डॉग शेल्टर बनाने और फिर इनमें खतरनाक कुत्तों को रखने की व्यवस्था की जानी थी। पर अभी एमसीडी और एनडीएमसी बस कागजी कार्रवाई पूरी करने में जुटे हैं। जबकि डॉग शेल्टर तो दूर की बात नजर आ रही हैं।
खूंखार कुत्तों को कहां रखा जाए इसकी व्यवस्था नहीं
एमसीडी की बात करें तो अभी तक उसने 735 फीडिंग प्वाइंट तो निर्धारित कर लिए हैं और सभी सार्जजनिक स्थलों जैसे अस्पतालों और सरकारी दफ्तरों के नोडल अधिकारी तो नियुक्त कर दिए हैं, लेकिन अभी खूंखार कुत्तों को कहां रखा जाए इसकी कोई व्यवस्था नहीं है।
हालांकि एक एनजीओ की मदद से दस आवारा खतरनाक कुत्तों को नजफगढ़ के एक शेल्टर में तो रख दिया है, लेकिन समस्या यह है कि दिल्ली में सैकड़ों की संख्या में लोग आवारा कुत्तों के शिकार हो रहे हैं उनकी समस्या का समाधान कैसे होगा।
फीडिंग प्वाइंट स्थापित करने तक ही सीमित है मामला
इन कुत्तों को कब डॉग शेल्टर में रखा जाएगा। क्योंकि अभी डॉग शेल्टर बनाने की प्रक्रिया केवल फाइलों पर ही चल रही है। अभी इसका टेंडर होगा फिर निर्माण होगा तो इसमें काफी समय लग जाएगा। एमसीडी के अनुसार जो फीडिंग प्वाइंट चिह्नित किए हैं उन पर साइनेज लगाने के बाद इन्हें फीडिंग प्वाइंट घोषित कर दिया जाएगा।
फीडिंग प्वाइंट बने फिर भी फीडिंग प्वाइंट से इतर खिलाया जा रहा है खाना
एनडीएमसी ने 100 के करीब फीडिंग प्वाइंट बना दिए हैं, लेकिन फिर फीडिंग प्वाइंट को छोड़कर पूर्व की जगह पर खाना खिलाया जा रहा है, लेकिन एक्टिविस्ट के डर से एनडीएमसी कोई भी कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।
एनडीएमसी के अनुसार उसने अपने पुराने पशु अस्पताल मोती बाग में 30 खूंखार कुत्तों को रखने के लिए डॉग शेल्टर बना लिया है। हालांकि अभी इसमें कोई कुत्ता नहीं रखा गया है। एनडीएमसी के अनुसार उसके इलाके मे 10 हजार आवारा कुत्तें हैं।
2023-24 में किए गए सर्वे के अनुसार 85-90 प्रतिशत कुत्तें बंध्याकृत पाए गए थे। एनडीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तें न रहे इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वहीं, जो पुराना पशु अस्पताल है इसमें डॉग शेल्टर को विस्तार करने की योजना है। इसके साथ ही पालतु कुत्तों के पंजीकरण को भी आनलाइन करने की योजना है।
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