आरोप लगाया गया कि कंपनी में कई तरह की और भी मनमानी की जा रही है।
जागरण संवाददाता, सोनभद्र। रेणुकूट स्थित मेसर्स हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड में स्थानीय लोगों को जाब नहीं दिया जा रहा है। कर्मचारियों के ईपीएफ व ईएसआइसी फंड में भी धांधली की जा रही है। यही नहीं कंपनी में कई तरह की और भी मनमानी की जा रही है। इसे लेकर कर्मचारियों वे स्थानीय लोगों में आक्रोश है।
इन्हीं समस्याओं को लेकर नगर पंचायत रेनुकूट की अध्यक्ष ममता सिंह, अनिल सिंह, अपना दल एस की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य (महिला माेर्चा) प्रीति सिंह के नेतृत्व में दर्जनों श्रमिक शुक्रवार को यहां सर्किट हाउस में पहुंच गए। यहां पर स्टांप एवं पंजीयन शुक्ल व सोनभद्र के जिला प्रभारी मंत्री रवीन्द्र जायसवाल से मुलाकात की और 12 सूत्रीय मांग पर भी सौंपा।
इस पर मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने कहा कि सरकार की मंशा है कि हरहाल में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के तौर पर योग्यता के अधार पर नौकरी दी जाए। साथ ही ईएसआइसी एवं ईपीएफओ में भी कोई गड़बड़ी नहीं हो। इस मामले में मंत्री जांच के निर्देश दिए।
लोगों का कहना है कि मेसर्स हिंडाल्को संस्थान में लगभग बारह हजार कर्मचारी कार्य करते हैं, जिसमें सर्वाधिक संख्या लगभग सात हजार संविदा श्रमिकों की है अर्थात पूरा कारखाना संविदा श्रमिकों द्वारा संचालित हो रहा है। संविदा श्रमिकों से परमानेन्ट नेचर के जाब पर कम पैसों पर काम करवाया जा रहा है।
कारखाने में सभी मशीनों के कार्य स्थल पर काम करवाने के बाद भी संविदा श्रमिकों के साथ भेद-भाव किया जाता है, कारखाने द्वारा प्रदत्त वेनत भुगतान, बोनस, अर्जित अवकाश-मेडिकल अवकाश, इत्यादि परमानेंट श्रमिक को ज्यादा तथा संविदा श्रमिक को कम प्रदान किया जाता है, जबकि एक ही कारखाना व जाब साइट भी एक ही है। इस मामले में जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
यह है प्रमुख मांगें
1. मेसर्स हिंडाल्को कारखाने के प्रारंभ से ही सभी कर्मचारियों के लिए त्रिवर्षीय समझौता करके वेनत व अन्य पावनाओं को तय किया जाता रहा है। यह त्रिवर्षीय समझौता समान रूप से संविदा श्रमिकों पर भी लागू था लेकिन विगत कुछ वर्षों से भेद-भाव करते हुए संविदा श्रमिकों का समझौता पांच वर्षों से किया जाने लगा जो सवर्था गलत, नियम विरुद्ध, मनमाना, एकतरफा व मजदूरों के हितों के विपरीत व शोषण करने वाला है। अतः प्रत्येक दशा में पूर्व की भाँति सभी कर्मचारियों का समझौता एक समान तीन वर्षों के लिए ही मान्य किया जाय साथ ही साथ अगामी त्रिवर्षीय समझौते के साथ संविदा श्रमिकों का भी समझौता किया जाय।
2-मेसर्स हिंडाल्को लिमिटेड एक इंजीनियरिंग कारखाना है। ऐसे में प्रत्येक दशा में इस कारखाने में इंजीनियरिंग बेज बोर्ड की दरें लागू की जानी चाहिए।
3- हिंडाल्को में अधिकांश संविदा श्रमिक परमानेन्ट नेचर के जाब पर कार्य ही करते हैं, नियमानुसार समान कार्य समान वेतन के अनुसार सभी परमानेन्ट नेचर के जाब पर कार्य करने वाले संविदा श्रमिकों को भी परमानेन्ट श्रमिकों के बराबर वेतन व अन्य सभी सुविधायें प्रदान की जाए।
4- हिंडाल्को कारखाने में कार्यरत सभी संविदा श्रमिकों को परमानेन्ट श्रमिकों की भांति व बराबर बोनस का भुगतान अवकाश की सुविधा, मेडिकल अवकाश के साथ अन्य सुविधायें व लाभ प्रदान किये जाये, साथ ही साथ सभी संविदा श्रमिकों को परमानेन्ट श्रगिक को प्रत्येक वर्ष मिलने वाला पीएच का लाभ संविदा श्रमिकों को भी दिया जाए।
5- हिंडाल्को में कार्यरत सभी संविदा श्रमिकों को अनिवार्य रूप से परमानेन्ट श्रमिकों की भांति क्वार्टर एलाटमेन्ट कर रहने की सुविधा प्रदान की जाय।
6- हिंडाल्को में कार्यरत सभी संविदा श्रमिकों का गेटपास एक बार में ही जितने दिन श्रमिक ड्यूटी करता है उत्तने दिन का बनाया जाय। किसी भी श्रमिक का गेटपास पाँच वर्ष से कम समय के लिए नहीं बनाया जाय। ठेकेदार बदलने पर श्रमिकों का कार्य समाप्त कर नया गेटपास बनाने की प्रक्रिया बन्द की जाय, क्यों कि इससे श्रमिकों के सर्विस की (निरंतरता) भंग होती है तथा श्रमिक का बहुत्त ज्यादा नुकसान होता है।
7-कारखाने में कार्यरत टन व पीस रेट के कर्मचारियों के साथ भेद-भाव बन्द किया जाय, इनको भी 8 घंटे पर एक हाजिरी प्रदान की जाय, ज्यादा समय तक काम करने पर नियमानुसार ओवर टाइम प्रदान किया जाय। टन व पीस रेट के कर्मचारियों के हाजिरी में कटौती कर नियम विरुद्ध नगद भुगतान बन्द किया जाय।
8- हिंडाल्को में भारत सरकार द्वारा जारी नये श्रम कानूनों के अनुसार यूनियन का चुनाव मजदूरों के बीच कराया जाय तथा 51 प्रतिशत मजदूरों का समर्थन / मत पाने वाले व्यक्ति / यूनियन से ही मजदूरों का समझौता किया जाए।
9- हिंडाल्को में कार्यरत प्रत्येक संविदा श्रमिक के वेतन में क्रमशः कुशल, अर्द्धकुशल, अकुशल में कम से कम 250.00 रुपये, 200.00 रुपये व 150.00 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोत्तरी की जाय।
10- हिंडाल्को में कार्यरत संविदा श्रमिकों को जिनकी सेवा पांच वर्ष या पांच से ज्यादा हो गयी है उनको परमानेन्ट श्रमिक के रूप में भर्ती किया जाय तथा प्रत्येक नयी भर्ती में संविदा श्रमिकों को 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया जाय।
11- हिंडाल्को में स्थानीय नौजवानों, अनुसूचित जाति, जनजाति तथा पिता-पुत्र की भर्ती को वरीयता देते हुए 70% का आरक्षण इन्हें प्रदान किया जाय।
12- हिंडाल्को कारखाने में ज्यादा रेट पर ठेकेदारी का कार्य बाहरी ठेकेदारों से कराया जा रहा है, जबकि विगत 25-30 वर्षों से कारखाने में ठेकेदारी का कार्य कर रहे लोकल ठेकेदारों को कुछ नहीं करने दिया जाता है। यह शोषण बन्द करके स्थानीय ठेकेदारों को कम्पनी के ठेकेदारों में प्राथमिकता प्रदान की जाए। |
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