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मां की हत्या व बेटी के अपहरण के बाद मेरठ के कपसाढ़ में टकराव के हालात, अंतिम संस्कार को तैयार नहीं परिवार

Chikheang 3 day(s) ago views 113
  

मेरठ के कपसाढ़ गांव में तैनात फोर्स  



जागरण संवाददाता, मेरठ। कपसाढ़ में हुई सुनीता की हत्या व बेटी के अपहरण ने ठाकुर चौबीसी का माहौल गर्मा दिया है। ठाकुर बाहुल गांव में गुरुवार को जिस तरह घटना को अंजाम दिया गया, उसने टकराव के हालात बना दिए। बेटी के दहलीज पर आने तक अंतिम संस्कार न करने के ऐलान ने पुलिस प्रशासन की धड़कन बढ़ा दी।

उधर, 48 घंटे में युवती की बरामदगी के आश्वासन पर शुक्रवार दोपहर बाद पीड़ित परिवार के अंतिम संस्कार करने पर सहमत होने की चर्चा थी, लेकिन अभी तक परिवार नहीं माना है। एसपी देहात व स्वजन के बीच जमकर नोकझोंक हुई।

  

विधायक अतुल प्रधान, पूर्व विधायक योगेश वर्मा और मुकेश सिद्धार्थ ने पीड़ित परिवार से बातचीत की। परिवार के लोग अतुल प्रधान को धरने से उठाकर घर पर ले आए थे। इसे लेकर योगेश वर्मा ने अतुल प्रधान पर टिप्पणी भी की।

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पूर्व सांसद संजीव बालियान पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे।
बस्तियों में लोगों के चेहरे पर दिखा आक्रोश

गुरुवार को कपसाड़ आने वाले तीन मुख्य रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात कर गांव को पूरी तरह सील कर दिया गया था। अनुसूचित समाज की बस्तियों में लोगों के चेहरे पर आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था। वह हर लड़ाई लड़ने को तैयार दिखाई दिए। ठाकुर समाज की बस्ती में हर कोई गांव में हो रही पुलिस व बाहरी लोगों की आमद को देखकर चर्चा कर रहा था। गांव में तनाव के बीच पनपते टकराव के हालात से निपटने को पुलिस अधिकारी मंथन में जुटे हैं। जिस अंदाज में दलित नेताओं व विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया आ रही है, उससे बदलते हालात से निपटने की पुलिस तैयारी में जुटी है।
कपसाढ़ गांव की आबादी लगभग 15 हजार

कपसाढ़ गांव की आबादी लगभग 15 हजार है। इसमें लगभग नौ हजार ठाकुर, तीन हजार अनुसूचित जाति, दो हजार पंडित व बाकी अन्य बिरादरी के घर के हैं। दो मुस्लिम परिवार भी हैं। अनुसूचित जाति के लोग मेहनत मजदूरी से जुड़े हैं। गांव में दोनों समाज में टकराव व झगड़े का पुराना रिकार्ड नहीं है।

गुरुवार को गांव में सतेंद्र कुमार के परिवार के साथ जो हुआ, उसे हर कोई बुरा तो बता रहा है लेकिन इसके पीछे की वजह के बारे में कोई बोलने को तैयार नहीं है। गुपचुप तमाम तरह की चर्चाएं तो हो रही हैं लेकिन पीड़ित, आरोपित परिवार, गांव के प्रधान, जिम्मेदार लोग इस पर कुछ बोलने व बताने को तैयार नहीं हैं। प्रशासनिक पुलिस अधिकारी भी चुप्पी साधे रहे।
आरोपित के घरों में लगा ताला

किशोरी के अपहरण व सुनीता के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना के बाद आरोपित पारस सोम व सुनील सोम के स्वजन घर के दरवाजे पर ताला लगाकर चले गए। बाद में पुलिस ने पारस सोम के माता पिता व एक अन्य स्वजन को हिरासत में ले लिया। उनसे आरोपितों के बारे में जानकारी की जा रही है।
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