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इस Makar Sankranti, गंगा स्तोत्र की स्तुति से करें अपने दिन की शुरुआत, मिलेंगे पुण्य फल

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Makar Sankranti 2026 जरूर करें गंगा स्तोत्र का पाठ



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य देव की उपासना करने से व्यक्ति को निरोगी काया और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।  खरमास का समापन भी इसी दिन होता है, जिससे शुभ कार्य पुनः आरंभ होते हैं। गंगा स्नान के साथ-साथ इस दिन पर गंगा जी की स्तुति करने का भी विशेष महत्व है। ऐसे में चलिए पढ़ते हैं गंगा स्तोत्र।
गंगा स्तोत्र (Ganga Stotra lyrics)

देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे त्रिभुवनतारिणि तरल तरंगे।

शंकर मौलिविहारिणि विमले मम मति रास्तां तव पद कमले ॥

भागीरथिसुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यातः ।

नाहं जाने तव महिमानं पाहि कृपामयि मामज्ञानम् ॥

हरिपदपाद्यतरंगिणि गंगे हिमविधुमुक्ताधवलतरंगे ।

दूरीकुरु मम दुष्कृतिभारं कुरु कृपया भवसागरपारम् ॥

तव जलममलं येन निपीतं परमपदं खलु तेन गृहीतम् ।

मातर्गंगे त्वयि यो भक्तः किल तं द्रष्टुं न यमः शक्तः ॥

पतितोद्धारिणि जाह्नवि गंगे खंडित गिरिवरमंडित भंगे ।

भीष्मजननि हे मुनिवरकन्ये पतितनिवारिणि त्रिभुवन धन्ये ॥

कल्पलतामिव फलदां लोके प्रणमति यस्त्वां न पतति शोके ।

पारावारविहारिणि गंगे विमुखयुवति कृततरलापांगे ॥

तव चेन्मातः स्रोतः स्नातः पुनरपि जठरे सोपि न जातः ।

नरकनिवारिणि जाह्नवि गंगे कलुषविनाशिनि महिमोत्तुंगे ॥

पुनरसदंगे पुण्यतरंगे जय जय जाह्नवि करुणापांगे ।

इंद्रमुकुटमणिराजितचरणे सुखदे शुभदे भृत्यशरण्ये ॥

रोगं शोकं तापं पापं हर मे भगवति कुमतिकलापम् ।

त्रिभुवनसारे वसुधाहारे त्वमसि गतिर्मम खलु संसारे ॥

अलकानंदे परमानंदे कुरु करुणामयि कातरवंद्ये ।

तव तटनिकटे यस्य निवासः खलु वैकुंठे तस्य निवासः ॥

वरमिह नीरे कमठो मीनः किं वा तीरे शरटः क्षीणः ।

अथवाश्वपचो मलिनो दीनस्तव न हि दूरे नृपतिकुलीनः ॥

भो भुवनेश्वरि पुण्ये धन्ये देवि द्रवमयि मुनिवरकन्ये ।

गंगास्तवमिमममलं नित्यं पठति नरो यः स जयति सत्यम् ॥

येषां हृदये गंगा भक्तिस्तेषां भवति सदा सुखमुक्तिः ।

मधुराकंता पंझटिकाभिः परमानंदकलितललिताभिः ॥

गंगास्तोत्रमिदं भवसारं वांछितफलदं विमलं सारम् ।

शंकरसेवक शंकर रचितं पठति सुखीः त्व ॥

  

(AI Generated Image)
मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति पुण्य काल - दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शाम 5 बजकर 45 मिनट तक

मकर संक्रांति महा पुण्य काल - दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शाम 4 बजकर 58 मिनट तक

मकर संक्रांति का क्षण - दोपहर 3 बजकर 13 मिनट तक

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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