search

मकर संक्रांत‍ि के बाद भी बैंड- बाजा और बरात का इंतजार, एक फरवरी को होगा शुक्रोदय, वैवाहिक लग्न चार फरवरी से

LHC0088 2026-1-9 17:27:41 views 574
  



शैलेश अस्थाना, जागरण, वाराणसी। पिछले वर्षों में प्राय: मकर संक्रांति के दिन सूर्य के धनु से मकर राशि में संचरण करने के साथ उत्तरायण होते ही खरमास समाप्त हो जाता था और अगले दिन से समस्त शुभ, मांगलिक व वैवाहिक लग्न आरंभ हो जाते थे। इस बार ग्रह, नक्षत्रों, वार, करण का ऐसा चक्कर पड़ा है कि खरमास समाप्त होने के 210 दिन बाद ही बैंड बाजा, बरात व शादी के लड्डुओं का क्रम शुरू हो सकेगा।

इस संबंध में काशी के ज्योतिषी शुक्र ग्रह के अस्त होने को कारण बता रहे हैं। सिर्फ विवाह ही नहीं अन्य सनातन धर्म में शुभ व मंगल माने जाने वाले अन्य कार्यादि अनुष्ठान भी इस अवधि में तब तक नहीं किए जा सकेंगे जब तक कि शुक्रोदय न हाे जाए।

बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष व श्रीकाशी विद्वत परिषद के अखिल भारतीय संगठन मंत्री प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि शुक्र ग्रह अभी अस्त चल रहे हैं, पिछले वर्षों में प्राय: खरमास समाप्ति के साथ ही शुक्रोदय हो जाया करता था किंतु इस बार शुक्रोदय चार फरवरी को होगा और उसी दिन से वैवाहिक लग्नों के मुहूर्त आरंभ होंगे। चार फरवरी से लेकर 14 मार्च तक वैवाहिक लग्नों की धूम होगी। इस बीच में 20 दिन तक ऐसे शुभ मुहूर्त मिलेंगे।

प्रो. पांडेय ने बताया कि जब शुक्र अस्त होते हैं तो विवाह ही नहीं सनातन धर्म में शुभ व मांगलिक माने जाने वाले कोई भी कार्य जैसे, गृहप्रवेश, गृहारंभ, मुंडन, जनेऊ, द्विरागमन (गौना), प्रथम देवयात्रा आरंभ, व्रतारंभ, व्रत उद्यापन, तालाब, वापी, कूप आदि का खनन, षोडश महादान, दीक्षा, संन्यास, अग्निहोत्र, राज्याभिषेक, चातुर्मास्य की समाप्ति आदि नहीं किए जाते। बच्चों के वे संस्कार, जिनमे काल निर्धारित काल का अतिक्रमण हो गया हो, वे भी इस अवधि में नहीं होते।

एक फरवरी को होगा शुक्रोदय, चार को बालत्व से निवृत्ति

प्रो. पांडेय ने बताया कि इस बार सूर्य धनु से मकर राशि में तो 14 जनवरी की रात 9:39 बजे पहुंचकर उत्तरायण हो जाएंगे किंतु शुक्रोदय एक फरवरी को होगा और तीन दिनों तक वे बाल्यावस्था में रहते हैं, इसलिए चार फरवरी से विवाहादि के लग्न मुहूर्त मिलना आरंभ होंगे। उन्होंने बताया कि शुक्र की बाल्यावस्था और अस्त के तीन दिन पूर्व वृद्धावस्था में भी शुभ कार्य वर्जित होते हैं।

हाेलाष्टक दोष इधर नहीं, इसलिए फाल्गुन में चलते रहेंगे मांगलिक विधान
बीएचयू ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर सुभाष पांडेय बताते हैं कि चार फरवरी से आरंभ लग्न इस बार 14 मार्च तक रहेगी। 15 मार्च से पुन: खरमास आरंभ हो जाएगा। सतलज, इरावती आदि के क्षेत्रों को छोड़ इधर होलाष्टक का प्रभाव नहीं होता, इसलिए होली के आठ दिन पूर्व की अवधि में भी वैवाहिक कार्य चलते रहेंगे।

14 मार्च को अर्धरात्रि के बाद 3:36 बजे तक कर लेना विवाह-विदाई

प्रो. सुभाष पांडेय ने बताया कि इस पंचांग सत्र की अंतिम वैवाहिक लग्न 14 मार्च को है। 14 मार्च की अर्धरात्रि के बाद 15 मार्च के सूर्योदय के पूूर्व 3:36 बजे पुन: खरमास लग जाएगा। अतएव उस दिन जो भी विवाहादि मंगल कार्यों की तिथि निश्चित की जाएगी, उसमें इस बात का ध्यान रखना होगा और 3:36 बजे के पूर्व विवाह अनुष्ठा पूर्ण कर विदाई आदि सभी कार्य संपन्न कर लेने होंगे।

इस सत्र में पड़ने वाले वैवाहिक मुहूर्त
फरवरी माह में वैवाहिक लग्न की तिथियां : 04, 05, 06, 10, 11, 12, 13, 14, 19, 20, 21, 24, 25, 26

मार्च माह में लग्न : 9, 10, 11, 12, 13, 14 (15 मार्च से पुन: खरमास आरंभ)
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
165128