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रजाई में घुसकर चलाते हैं मोबाइल? सावधान! आंखों पर चोरी-छिपे हमला कर रही यह गंभीर बीमारी

deltin33 3 day(s) ago views 540
  

रात में मोबाइल का उपयोग बढ़ा रहा ग्लूकोमा का खतरा, जानें बचाव के तरीके (Picture Credit- AI Generated)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ग्लूकोमा (Glaucoma) को अक्सर \“साइलेंट थेफ्ट ऑफ साइट\“ कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह बीमारी दबे पांव आती है। शुरुआत में न कोई दर्द होता है और न ही कोई लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन जब तक मरीज को इसका पता चलता है, तब तक आंखों की रोशनी को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है, जिसे ठीक करना नामुमकिन है।

इसलिए इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक बनाने मकसद से हर साल जनवरी में ग्लूकोमा अवेयरनेस मंथ मनाया जाता है। ग्लूकोमा के कई कारण होते हैं, जिसमें से एक रात के समय मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल है। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली में ऑप्थेल्मोलॉजी (केटेरेक्ट और रिफ्रेक्टिव सर्जन) के डायरेक्टर डॉ. रिंकी आनंद गुप्ता से बातचीत की।

  
मोबाइल और ग्लूकोमा का क्या है कनेक्शन?

डॉक्टर बताते हैं कि ग्लूकोमा का मुख्य कारण आंखों के अंदर दबाव (Pressure) का बढ़ना, जिससे देखने वाली नस (Optic Nerve) कमजोर हो जाती है। हालांकि, विज्ञान यह पूरी तरह साबित नहीं करता कि सिर्फ फोन चलाने से ग्लूकोमा होता है, लेकिन यह आग में घी डालने का काम जरूर करता है। कैसे आंखों पर असर डालता है मोबाइल-

  • अंधेरे में स्क्रीन: जब आप अंधेरे कमरे में फोन की चमकदार स्क्रीन देखते हैं, तो आंखों पर बहुत ज्यादा जोर पड़ता है।
  • पलकें न झपकाना: फोन देखते समय हम पलकें कम झपकाते हैं, जिससे आंखें ड्राई और लाल हो जाती हैं।
  • नींद और ब्लू लाइट (Blue Light): फोन से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद उड़ा देती है। डॉक्टर मानते हैं कि अगर नींद पूरी न हो, तो आंखों का दबाव बढ़ सकता है, जो ग्लूकोमा के खतरे को बढ़ा देता है।
  
कब बढ़ जाता है खतरा?

अगर किसी को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर है या परिवार में पहले किसी को ग्लूकोमा रहा है, तो उन्हें ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। अक्सर लोग सिरदर्द या ब्लर विजन को यह सोचकर नजरअंदाज कर देते हैं कि “शायद फोन ज्यादा देख लिया, इसलिए थकान है,“ जबकि यह ग्लूकोमा का शुरुआती संकेत हो सकता है। बचाव के छोटी-छोटी आदतें आपकी आंखों को सुरक्षित रख सकती हैं:-

  • सोने से पहले दूरी: सोने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले फोन को खुद से दूर कर दें।
  • सेटिंग बदलें: फोन में \“नाइट मोड\“ या \“वार्म लाइट\“ का इस्तेमाल करें और ब्राइटनेस कम रखें।
  • चेकअप है जरूरी: ग्लूकोमा से बचने का सबसे अच्छा हथियार है- रेगुलर चेकअप। अगर आपकी उम्र 40 से ऊपर है, तो साल में एक बार आंखों के दबाव और नसों की जांच जरूर करवाएं।


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