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एटा के चर्चित अनुपम अडंगा हत्याकांड में फैसला, 20 साल बाद सभी आरोपी दोषमुक्त

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एटा जेल।



जागरण संवाददाता, एटा। शहर के सबसे चर्चित हत्याकांडों में शामिल चेयरमैन अनुपम गुप्ता अडंगा हत्याकांड में आखिरकार करीब दो दशक बाद न्यायिक प्रक्रिया पूर्ण हुई। शिकोहाबाद रोड पर दिनदहाड़े हुई इस हत्या के मामले में सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए दोनों पक्षों के सभी आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट का मानना रहा कि प्रस्तुत किए गए साक्ष्य और गवाह आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
2002 में शिकोहाबाद रोड पर हुई थी चेयरमैन अनुपम गुप्ता अडंगा की हत्या

यह मामला 24 अप्रैल 2002 का है। कोतवाली नगर क्षेत्र के शंकर सदन मोहल्ला कटरा निवासी आलोक गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उनके भाई नगर पालिका चेयरमैन अनुपम गुप्ता अडंगा सफाई व्यवस्था की जांच के लिए शिकोहाबाद रोड गए थे। उसी दौरान प्रेमनगर के पास विजितेंद्र गुप्ता, राहुल गुप्ता, राघवेंद्र, ज्ञानेश्वर गुप्ता, चंद्रमणि, विमल गुप्ता, विपुल कुलश्रेष्ठ, मोहित जैन और राकेश भदौरिया ने गाली-गलौज करते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।

इस घटना में चेयरमैन अनुपम गुप्ता अडंगा और अशोक कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने चेयरमैन को मृत घोषित कर दिया था। इस घटना से शहर में भारी तनाव फैल गया था।
दोनों पक्षों से दर्ज हुए थे मुकदमे


दूसरी ओर, इसी मामले में दूसरा मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। राहुल गुप्ता की पत्नी सारिका गुप्ता निवासी प्रेमनगर ने कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 25 मार्च 2002 को उनके पति के साथ मारपीट की गई थी। इसके बाद 24 अप्रैल 2002 की सुबह करीब नौ बजे कार्यालय में काम करते समय उनके पति राहुल गुप्ता और ससुर विजितेंद्र गुप्ता पर चेयरमैन अनुपम गुप्ता, संतोष गुप्ता, संजीव, अशोक, आलोक, मुकेश, पवन कुमार, रिंकू, सरला, सुधीर समेत अन्य लोगों ने फायरिंग की थी। इस हमले में उनके पति बाल-बाल बच गए थे, जबकि आरोपितों ने वाहनों में भी तोड़फोड़ की थी।
दोनों मुकदमों में सभी आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया गया


दोनों ही मामलों में पुलिस ने विवेचना पूरी कर साक्ष्य और गवाह अदालत में पेश किए। मामले की सुनवाई सत्र न्यायाधीश दिनेश चंद्र के न्यायालय में हुई। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर दोनों मुकदमों में सभी आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया गया। करीब 20 वर्षों तक चले इस चर्चित हत्याकांड में फैसले के बाद शहर में यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
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