जाट आरक्षण आंदोलन: रोहतक कोर्ट ने आठ साल पुराने मामले में सात आरोपितों को बरी किया (File Photo)
जागरण संवाददाता, रोहतक। जाट आरक्षण आंदोलन में हिसार बाईपास पर विरोध के दौरान रास्ता रोकने और दंगा भड़काने के आरोप लगाकर दर्ज किए गए मामले में वीरवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मोहम्मद सागीर की अदालत ने फैसला सुनाया है।
सिटी पुलिस थाना में यह मामला दर्ज किया गया था। एडवोकेट रजनीश मलिक ने बताया कि राज्य बनाम सुनील व अन्य मामले में रोहतक की अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। इस केस में कुलदीप, जितेंद्र, सुनील उर्फ गोलू, सुनील पुत्र जगदीश, जसबीर, सुनील उर्फ शीला और अशोक उर्फ सोनू आरोपित थे। अदालत में आरोपितों के बयान दर्ज किए गए।
अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि आरोप साबित नहीं हो सके, जिस पर सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया है। मामले में 11 आरोपित थे। सात को बरी कर दिया गया है वहीं एक आरोपित सुमित उर्फ भोलू की मौत हो चुकी है।
फैसले के बाद अदालत ने आरोपितों के पहले से चल रहे जमानत बांड रद्द कर दिए। हालांकि, कानूनी प्रावधानों के तहत सभी आरोपितों से 20-20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बांड भरवाए गए हैं, जो अगले छह महीने तक प्रभावी रहेंगे। यह बांड इसलिए लिए गए हैं। |