पर्यावरणविद पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी. File Photo
ऑनलाइन टीम, देहरादून। प्रदेश में बीते दो सप्ताह से अंकिता भंडारी हत्याकांड सुर्खियों पर है। अंकिता के हत्याकांड के दौरान यह बात सामने आई थी कि किसी वीआईपी को सर्विस के लिए उस पर दबाव डाला गया। इस वीआईपी का नाम उजागर करने के लिए विभिन्न राजनीतिक दल सड़कों पर भी उतरे। इस बीच अंकिता भंडारी के माता-पिता ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उनसे सीबीआइ जांच की मांग रखी थी।
वहीं अंकिता हत्याकांड प्रकरण में वीआईपी का नाम उजागर करने के लिए शुक्रवार को देहरादून में मुकदमा दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को दी गई शिकायत की जांच के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीबीआइ जांच का फैसला किया है।
कौन हैं डॉ. अनिल प्रकाश?
बता दें कि पुलिस महानिदेशक को उक्त शिकायत पर्यावरणविद पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी द्वारा दी गई थी। पर्यावरणविद पदमभूषण डा. अनिल प्रकाश जोशी हिमालयन एनवायरमेंटल स्टडीज एंड कंजर्वेशन आर्गेनाइजेशन (हेस्को) के संस्थापक हैं। डा. जोशी पिछले चार दशकों से ग्रामीण विकास, पारिस्थितिकी संरक्षण, जल प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और समाज-आधारित विज्ञान के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्हें \“माउंटेन मैन\“ और \“अशोका फेलो\“ के रूप में भी जाना जाता है। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण से भी नवाजा है।
डीजीपी से की यह शिकायत
पुलिस महानिदेशक को दी शिकायत में उन्होंने कहा था कि वर्तमान में चल रही चर्चाओं में अंकिता भंडारी हत्याकांड में कुछ अज्ञात व्यक्तियों, जिन्हें वीआईपी के रूप में संदर्भित किया जा रहा है, के विरुद्ध एक स्वतंत्र अपराध में संलिप्त होने का आरोप लगाया जा रहा है।
यद्यपि अंकिता भंडारी हत्याकांड में संलिप्त अपराधियों को सजा हो चुकी है, लेकिन इंटरनेट मीडिया में ऐसा कहा जा रहा है कि प्रकरण में कतिपय साक्ष्यों को छिपाया अथवा नष्ट किया गया है। ऐसे में वीआईपी कहे जा रहे किसी अज्ञात व्यक्ति से संबंधित इस स्वतंत्र अपराध की जांच किया जाना पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यह संपूर्ण प्रकरण उक्त अज्ञात वीआईपी से संबंधित है। इसलिए केस के तथ्यों को उजागर करने के लिए एक पृथक एवं स्वतंत्र निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। इसलिए इस मामले की पड़ताल निष्पक्ष जांच एजेंसी से कराना जरूरी है।
जिसके बाद पुलिस महानिदेशक ने एसएसपी देहरादून अजय सिंह मामले की जांच सौंपी। उन्होंने थानाध्यक्ष वसंत विहार को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश जारी किए और गृह विभाग को पत्र लिखकर सीबीआइ से जांच करवाने की संस्तुति की। इसके आधार पर ही मुख्यमंत्री धामी ने प्रकरण की जांच सीबीआइ से करवाने की संस्तुति की।
क्या था घटनाक्रम
- 11-18 सितंबर 2022 के बीच हुई अंकिता की हत्या
- 18 सितंबर 2022 को अंकिता का फोन न उठने पर खुला मामला, रिपोर्ट दर्ज
- 22 सितंबर को आरोपित पुलकित आर्या, सौरभ भाष्कर व अंकित गुप्ता गिरफ्तार
- 24 सितंबर को चीला झील से अंकिता का शव बरामद, सरकार ने एसआइटी का किया गठन
- 25 सितंबर को अंकिता का दाह-संस्कार
- दिसंबर 2022 को एसआइटी ने कोर्ट मे सौंपीं 500 पन्नों की जांच रिपोर्ट
- 30 मई, 2025 को निचली अदालत ने सभी अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई
- 20-23 दिसंबर, 2025 के बीच इंटरनेट मीडिया पर वीआईपी के नाम की आडियो क्लिप वायरल
- सात जनवरी, 2026 को अंकिता के माता-पिता ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात, सीबीआइ जांच की मांग
- नौ जनवरी, 2026 को मुख्यमंत्री ने की सीबीआइ जांच की संस्तुति की
यह भी पढ़ें- Ankita Bhandari Case: \“एक्सट्रा सर्विस\“ देने को लेकर हुई थी अंकिता की हत्या, आरोपितों को उम्र कैद; लेकिन नहीं खुला ये राज
यह भी पढ़ें- अंकिता भंडारी मामले में सीएम धामी ने CBI जांच की संस्तुति की, बोले- निष्पक्ष न्याय हमारा उद्देश्य
यह भी पढ़ें- अंकिता भंडारी हत्याकांड : VIP का नाम उजागर करने के लिए देहरादून में मुकदमा दर्ज |
|