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स्मार्टफोन की स्क्रीन में सिमटा बचपन, संकट में खिलौना बाजार

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प्रभात कुमार पाठक, गोरखपुर। बचपन की वह मासूमियत, जो कभी लकड़ी की गाड़ियों, गुड़ियों और टेडी बियर के इर्द-गिर्द घूमती थी, अब स्मार्टफोन की स्क्रीन में सिमट कर रह गई है। तकनीक के बढ़ते प्रभाव और बच्चों में मोबाइल फोन के प्रति बढ़ते आकर्षण ने न केवल उनकी सेहत पर बुरा असर डाला है, बल्कि पारंपरिक खिलौना बाजार की रौनक को भी फीका कर दिया है।

जो खिलौने बच्चों के सपनों का हिस्सा हुआ करते थे अब उनका साथ छूटता जा रहा है। खिलौना कारोबारियों की मानें तो पिछले चार वर्षों में खिलौने के कारोबार में भारी गिरावट आई है। बच्चों का रुझान फिजिकल खिलौने से हटकर डिजिटल मनोरंजन की ओर बढ़ गया है, जिसका सीधा असर स्थानीय व्यापारियों की आजीविका पर पड़ रहा है।

एक दौर था जब बच्चों के लिए टेडी बियर पहली पसंद हुआ करते थे, लेकिन अब उनकी जगह मोबाइल गेम्स और वीडियो ने ले ली है। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर खिलौनों की बिक्री पर पड़ा है। प्रतिदिन दर्जनों खिलौने बेचने वाले व्यापारी अब दिन भर में मात्र चार से पांच पीस तक ही सिमट कर रह गए हैं। अब खिलौने बच्चों के शौक के लिए नहीं, बल्कि केवल औपचारिकता निभाने या किसी को उपहार देने तक सीमित रह गए हैं।

व्यापारियों का दर्द, उजड़ रहा है दशकों पुराना कारोबार
दशकों पुराने कारोबार उजड़ने का दर्द खिलौना कारोबारियों के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा है। शाहमारूफ स्थित खिलौना व्यापारी साजिद ने बताया कि मोबाइल क्रांति से पहले खिलौनों का कारोबार अपने चरम पर था। एक समय था जब दुकान पर ग्राहकों के कारण पैर रखने की जगह नहीं होती थी, लेकिन अब खरीदारी बहुत कम हो गई है। डिजिटल गेम्स ने बच्चों की दुनिया ही बदल दी है।

रेती रोड स्थित खिलौना व्यापारी दानिश ने बताया कि बाजार में नई जान फूंकने के लिए उन्होंने हरियाणा, गुजरात, दिल्ली और मुंबई के बड़े बाजारों से खास स्टाक मंगवाया है। इस कलेक्शन में छोटे से लेकर विशाल आकार के टेडी बियर और लोकप्रिय कार्टून किरदारों वाले खिलौने शामिल हैं। उनके पास 10 से लेकर पांच हजार तक के खिलौने उपलब्ध हैं। यह अब जो थोड़ा-बहुत खिलौने बिकते भी हैं तो वह भी गिफ्ट देने के लिए।

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खिलौनों का व्यापार अब काफी हद तक सिर्फ गिफ्ट आइटम तक सिमट गया है। लोग अब जन्मदिन या त्योहारों पर ही खरीदारी के लिए आते हैं। साफ्ट टायज में कुछ मांग जरूर रहती है, लेकिन पहले जैसा मुनाफा अब नहीं रहा। -राज कमल, टेडी बियर विक्रेता, रेती रोड

बाजार का ट्रेंड पूरी तरह बदल चुका है। पहले बच्चे दुकान पर आकर कई खिलौने चुनते थे, लेकिन अब वे मोबाइल पर जो देखते हैं, बस वही खास चीज मांगते हैं। ई-कामर्स साइट्स के आकर्षक आफर्स ने हमारे पारंपरिक व्यापार को बहुत नुकसान पहुंचाया है। -राजेश कुमार, खिलौना व्यापारी, शाहमरूफ

आनलाइन बाजार ने स्थानीय दुकानदारों की कमर तोड़ दी है। भारी छूट और मोबाइल गेम्स के चलते पिछले चार वर्षों में कारोबार में 20 से 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। अब बच्चे खिलौनों से ज्यादा मोबाइल स्क्रीन को पसंद कर रहे हैं। -मनीष विश्वकर्मा, कारोबारी, गोलघर

आजकल बच्चों के बीच केवल सुपरहीरो और हाटवील्स कार जैसी ब्रांडेड चीजों का ही क्रेज बचा है। साधारण खिलौनों के प्रति बच्चों का रुझान कम हुआ है। पिछले पांच सालों में हमारे व्यापार में करीब 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। -इमरान खान, खिलौना व्यापारी, रुस्तमपुर


मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहा है। इससे बच्चों में चिड़चिड़ापन आ रहा है। एकाग्रता कमजोर होने की समस्या बढ़ रही है। मोबाइल ज्यादा देर देखने के कारण बच्चों में तनाव और बेचैनी देखी जा रही है। उनकी खेलकूद व बातचीत की गतिविधियां कम हो रही हैं, इससे अनेक बच्चे बोलना नहीं सीख पा रहे हैं।
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-डा.अमित कुमार शाही, मानसिक रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल


मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, सूखापन और सिरदर्द की समस्या बढ़ रही है। इससे बच्चों की नजर कमजोर होने का खतरा रहता है। लगातार मोबाइल के उपयोग से आंखों की थकान और नींद में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित रखें।
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-डा.रजत कुमार, नेत्र रोग विशेषज्ञ
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