रिश्वत लेने के आरोपी ईटीओ और इंस्पेक्टर गिरफ्तार। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। जीएसटी नंबर जारी करने के बदले रिश्वत लेने के आरोपित आबकारी एवं कराधान विभाग के दोनों अधिकारियों को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील दीवान की अदालत ने सबूतों एवं गवाहों के बयान के आधार पर शुक्रवार को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल की कैद की सजा सुना दी।
दोनों के ऊपर दो-दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सजा सुनाए जाने के साथ ही दोनों को भेज भेज दिया गया।
मामला वर्ष 2022 के मई महीने में सामने आया था। शिकायत के मुताबिक कारोबारी मोहित ने फरीदाबाद में अपना कारोबार शुरू करने हेतु आबकारी एवं कराधान विभाग में जीएसटी नंबर लेने के लिए आवेदन दिया था।
रिजेक्ट होने पर फिर किया आवेदन
फाइल आबकारी एवं कराधान अधिकारी (ईटीओ) रोशनलाल के पास पहुंचा तो उन्होंने कमियां बताते हुए रिजेक्ट कर दिया था। उन्होंने फिर दोबारा आवेदन किया तो उन्हें गुरुग्राम में तैनात आबकारी एवं कराधान निरीक्षक (इंस्पेक्टर) सुमित्रा गोदारा से मिलने के लिए कहा गया।
जब वह इंस्पेक्टर से मिलने पहुंचे तो उनसे सात लाख रुपये की मांग की गई। एडवांस के रूप में दो लाख रुपये देने को कहा गया। परेशान कारोबारी ने इस बात की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो के टोल फ्री नंबर पर कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपितों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया।
यह भी पढ़ें- गुरुग्राम में मास्टर डिवाइडिंग रोड पर गरजा बुलडोजर, एक किलोमीटर लंबा अतिक्रमण हटा
ब्यूरो के करनाल कार्यालय में तैनात इंस्पेक्टर सुमित कुमार एवं इंस्पेक्टर सरोज के नेतृत्व में दो टीम गठित की गई। अलग-अलग टीम गुरुग्राम एवं फरीदाबाद कार्रवाई के लिए भेजी गई। साथ ही कारोबारी को पैसे देने के लिए इंस्पेक्टर सुमित्रा गोदारा के कार्यालय में भेजा गया।
नौ मई 2022 को जैसे ही इंस्पेक्टर ने पैसे लिए, वैसे ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके कुछ ही देर बाद फरीदाबाद कार्यालय से ईटीओ राेशनलाल को भी गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में दोनों को जमानत मिल गई थी। राेशनलाल वर्तमान में रोहतक कार्यालय में तैनात थे जबकि सुमित्रा गोदारा सस्पेंड चल रही हैं। उन्हें कुछ महीने पहले एक बार फिर पलवल में तैनाती के दौरान रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
दोनों एक ही बिल्डिंग में रहते थे
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2022 के दाैरान ईटीओ रोशनलाल एवं इंस्पेक्टर सुमित्रा गोदारा गुरुग्राम के सेक्टर-39 इलाके की एक बिल्डिंग में ऊपर-नीचे रहते थे। इस वजह से दोनों की अच्छी जान-पहचान थी। रोशनलाल गुरुग्राम में भी कार्यरत रहे हैं। दोनों गुरुग्राम में ही तैनात थे, इस वजह से शिकायत फरीदाबाद होने के बाद भी गुरुग्राम में मामला दर्ज कर स्थानीय अदालत में पेश किया गया था।
विभागीय मुख्यालय कर रहा फैसले का अध्ययन
अदालत के फैसले का आबकारी एवं कराधान विभाग का मुख्यालय अध्ययन कर रहा है। जल्द ही आगे की विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी। बताया जाता है कि दोनों अधिकारियों को अदालत से सजा सुनाई जा चुकी है। ऐसे में दोनों को बर्खास्त करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। अदालत के फैसले से पूरे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि कई अन्य अधिकारी भी रिश्वत लेने का आरोप झेल रहे हैं। फिलहाल वे जमानत पर बाहर कार्यरत हैं।
यह भी पढ़ें- पत्नी और मामा पर शक, हाथ-पैर बांधकर की गई हत्या फिर सेक्टर-37 में फेंक दिया था क्षत-विक्षत शव |
|