प्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, बरेली। हाईवे पर हादसे में घायल होने वाले लोगों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में कैशलेस इलाज का फायदा मिलेगा। इसके लिए महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीजी हेल्थ) डा. रतनपाल सिंह ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों (सीएमओ) से निजी अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल की सूची मांगी है।
स्वास्थ्य विभाग की इस कवायद से हादसे में घायल होने वालों को त्वरित व उचित इलाज मिलने में आसानी होगी। सड़क हादसों की संख्या बढ़ रही है। इसके घायलों को तुरंत इलाज मिले। इसके लिए बरेली मंडल के चारों जिलों के सीएमओ से हाईवे किराने के निजी अस्पतालों की लिस्ट भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि उन्हें पैनल में शामिल करने के लिए सूचीबद्ध किया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि जो जगह दुर्घटनाग्रस्त बाहुल्य (ब्लैक स्पाट) है, वहां आसपास अस्पतालों को चिह्नित करने में सतर्कता बरती जाएगी। मसलन, वहां गंभीर रूप से घायल होने वाले मरीजों के त्वरित और आधुनिक इलाज के क्या इंतजाम है? जिले में लखनऊ-दिल्ली, बरेली-बदायूं, बरेली-पीलीभीत नेशनल हाईवे और बरेली-नैनीताल स्टेट हाईवे है। इनको मिलाकर जिले में 45 ब्लैक स्पाट चिह्नित किए गए हैं।
हाईवे पर 50 की जगह 25 किमी पर रहे एंबुलेंस और क्रेन
पिछल महीने सड़क सुरक्षा समिति में शामिल हुए डा. रवीश अग्रवाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने हादसों में होने वाली मौतों को रोकने के लिए कई सुझाव दिए थे। इसमें हाईवे पर 50 किमी पर एंबुलेंस और क्रेन रहती है। इससे हादसे की स्थिति में मरीज को बचाने का जो गोल्डन टाइम होता है।
वह संसाधनों के इंतजार में निकल जाता है, इसलिए क्रेन व एंबुलेंस 50 की जगह हर 25 किमी की दूरी पर रहनी चाहिए। दुर्घटना के बाद वाहन के गेट लाक हो जाते हैं। ऐसे गाड़ी में फंसे लोगों को बाहर निकालने में काफी वक्त बर्बाद हो जाता है, इसलिए कटर का इंतजाम भी होना चाहिए।
क्यूआर कोड से नजदीकी अस्पताल की लोकेशन जानना होगा आसान : डा. रवीश
आइएमए यूपी स्टेट के प्रेसीडेंट इलेक्ट डा. रवीश अग्रवाल ने बताया कि दुर्घटना के बाद घायल कुछ बताने की स्थिति में नहीं होते हैं। वहीं राहगीरों को भी नजदीकी अस्पताल का पता नहीं होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री को यह भी सुझाव दिया था कि हाईवे पर हेल्पलाइन नंबर के साथ वहां क्यूआर कोड भी होना चाहिए, जिससे स्कैन करके नजदीकी किसी हास्पिटल की लोकेशन को आसानी से मालूम की जा सके, जिससे घायलों को अविलंब सुविधा का फायदा मिल सके।
हाईवे किनारे प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों को कैशलेस सुविधा देने के लिए शासन ने लिस्ट मांगी थी। इसे तैयार कर लिया गया है। सरकारी पैनल में शामिल करने के लिए इसे भेजा जा रहा है। इससे हादसे में घायल लोगों को त्वरित इलाज कराने में काफी आसानी होगी।
- डा. विश्राम सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी
सरकार का यह प्रयास है कि सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या को रोका जाए। इसके लिए ऐसे अस्पतालों को कैशलेस इलाज के लिए सूचीबद्ध किया जा रहा है, जहां गंभीर रूप से घायलों को भी समुचित इलाज की सुविधा मिल सके। इसके लिए प्रदेश के सभी सीएमओ को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
-डा. रतनपाल सिंह, महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं
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