चार साल में आठ हजार करोड़ किए खर्च, फिर भी इंदौर को नहीं मिल रहा शुद्ध जल (फोटो- जेएनएन)
जेएनएन, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का नगर निगम शहर की स्वच्छता व जल प्रबंधन पर पिछले चार वर्ष में आठ हजार करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी शहरवासियों को दूषित पानी ही पिलाता आ रहा है।
भागीरथपुरा में अब तक 21 लोगों की दूषित पेयजल से मौत और 3300 से अधिक लोगों के बीमार होने का मामला तब सामने आया है, जब मौजूदा वित्तीय वर्ष में निगम प्रशासन ने शहर की स्वच्छता और जल प्रबंधन पर 2450 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है।
नगर निगम जल आपूर्ति व प्रबंधन पर प्रतिवर्ष करीब 250 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इसमें नर्मदा पाइपलाइन के लीकेज, बोरिंग मेंटेनेंस व जलूद से जल आपूर्ति वाले सिस्टम का रख-रखाव व विद्युत खर्च शामिल है।
जाहिर है कि इतनी बड़ी धनराशि खर्च करने के बाद इंदौरवासी बेहद महंगा पानी पीते हैं, फिर भी उन्हें स्वच्छ पानी नहीं मिल पा रहा है। शहरी क्षेत्र में सप्लाई के दौरान ही पानी दूषित हो जाता है। उससे लोगों में बीमारियां फैल रही हैं। लोग अस्पताल में उपचार करने को विवश हैं।
पानी की टंकियों से 500 मीटर दूर पहुंचते ही पानी होता है दूषित
दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि शहर में बनी 105 टंकियों पर पानी की गुणवत्ता बेहतर होती है, लेकिन जैसे ही रहवासी क्षेत्रों में यह सप्लाई किया जाता है, कई बार 500 मीटर दूरी तक पानी पाइपलाइन में पहुंचने पर ही दूषित हो जाता है। वजह एक ही नर्मदा पाइपलाइन में लीकेज व ड्रेनेज लाइन व चैंबर चोक होने के कारण दूषित जल का नर्मदा लाइन में पहुंचना होता है।
जल प्रबंधन पर प्रतिवर्ष 250 करोड़ रुपये से अधिक खर्च
- 225 करोड़ रुपये : जलूद में बने पंपिग स्टेशन के संचालन व वहां से इंदौर तक आने वाले पानी का विद्युत खर्च।
- 25 करोड़ रुपये : शहर में नर्मदा पाइप लाइनों का मेंटेनेंस पर होता है खर्च।
- 25 करोड़ रुपये : शहर में नई टंकियों व पाइप लाइन निर्माण पर होता है खर्च।
- 7 करोड़ रुपये : जलूद से इंदौर तक आने वाली नर्मदा पाइप लाइन व पानी, जलूद में पानी ट्रीटमेंट व मेंटेनेंस पर खर्च।
- 4 करोड़ रुपये : इंदौर शहर में निगम के सार्वजनिक बोरिंग मेंटेनेंस पर खर्च।
ड्रेनेज लाइनों के मेंटेनेंस पर 50 करोड़ रुपये खर्च कर रहे
शहर में तीन हजार किलोमीटर हिस्से में नर्मदा पाइप लाइन बिछी है। वहीं 2200 किलोमीटर में सीवरेज लाइन है। सीवरेज लाइन के चैंबर व पाइप लाइनों के चोक होने के कारण नर्मदा पेयजल लाइन दूषित होती है। नगर निगम शहर में ड्रेनेज लाइनों के मेंटेनेंस पर 50 करोड़ रुपये खर्च करता है।
वहीं 50 करोड़ रुपये नई ड्रेनेज लाइन व चैंबरों के निर्माण पर खर्च होते हैं। दूषित पानी से दोगुनी रहती हैं ड्रेनेज संबंधित शिकायतें-इंदौर 311 एप पर आने वाली शिकायतों में दूषित पानी के मुकाबले ड्रेनेज चैंबर चोक होने व सीवरेज संबंधित शिकायतें दोगुना होती हैं।
यदि इन शिकायतों पर एक्शन लेकर सुधार कर दिया जाए तो नर्मदा पेयजल को दूषित होने से बचाया जा सकता है। प्रतिदिन 200 ड्रेनेज चैंबर की सफाई-नगर निगम के 22 जोन में हर दिन करीब 200 ड्रेनेज चैंबर की सफाई का कार्य किया जाता है।
इंदौर में दूषित पानी से एक की और मौत, आंकड़ा 21 पर पहुंचा
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के सेवन से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को एमवाय अस्पताल में भर्ती एक और महिला की मौत हो गई। उसकी पहचान सुनीता वर्मा (50) के रूप में हुई है।
स्वजन के अनुसार, सुनीता को छह जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। पहले उन्हें भागीरथपुरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से डाक्टरों ने एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया था। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। |
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