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जम्मू-कश्मीर में तीन कफ सीरप पर लगा प्रतिबंध, पाई गई जहरीले तत्व की मात्रा

LHC0088 2025-10-16 07:05:58 views 989
  

जम्मू-कश्मीर में तीन कफ सीरप पर लगा प्रतिबंध। फाइल फोटो



राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर ड्रग एंड फूड कंट्रोल आर्गनाइजेशन ने प्रदेश में जहरीले तत्व डायथिलीन ग्लाइकोल की अधिक मात्रा पाए जाने के बाद तीन कप सीरप पर प्रतिबंद लगा दिया है। प्रतिबंधित किए गए ये कफ सीरप, कोल्डरिफ सीरप, रेस्पीफ्रेश-टीआर व रेलिफ सीरप शामिल हैं। लैब में जांच के दौरान पाया गया कि ये कफ सीरप गुणवक्ता के मानकों पर खरा नहीं उतरते हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

यह कदम स्वास्थ्य मंत्रालय के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण कार्यक्रम के तहत उठाया गया। लैब की रिपोर्ट में पाया गया कि इन सिरिप में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक डायथिलीन ग्लाइकोल की अधिक मात्रा है। इससे शरीर में गंभीर विषाक्तता पैदा हो सकती है। यह तत्व मध्यप्रदेश व राजस्थान में बच्चों की मौतों से जुड़ा हुआ है।

प्रतिबंधित किया गया रेलिफ सीरप को शेप फर्मा लिमिटेड गुजराज ने बनाया है। वहीं, कोल्डरिफ सीरप श्रीसन फर्मास्यूटिकल तमिलनाडू व रेस्पीफ्रेश-टीआर को रेडनैस फर्मा अहमदबाद ने बनाया है। प्रदेश औषधि नियंत्रक कार्यालय द्वारा जारी नोटिस में कहा गया कि ये सीरप गुणवत्ता मानक के अनुरूप ने होने के कारण असुरक्षित हैं।

इसी बीच ड्रग एंड फूड कंट्रोल आर्गनाइजेशन ने स्किम्स सौरा व जम्मू-कश्मीर के सभी मेडिकल कालेज अस्पतालों के प्रचार्यों को निर्देश दिया है कि वे यह जानकारी सभी विभागाध्यक्षों तक तत्काल पहुंचाने के साथ मामले में आवश्यक कार्रवाई सुनिचित करें। इसी बीच नोटिस में कहा गया है कि मामला गंभीर है। इन इन सीरपों को मध्यप्रदेश व राजस्थान में बच्चों की मौतों से जोड़ा गया है। ऐसे में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में इनके उपयोग, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया गया है।

इसी बीच दवाई बिक्रेताओं को प्रदेश में उपलब्ध इन सीरपों के स्टाक के बारे में फौरन प्रदेश औषधि नियंत्रक कार्यालय को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। देश के कई राज्यों में इन खांसी की दवाओं पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है। वहीं, कुछ राज्यों ने दो वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सभी खांसी व जुकाम की दवाओं के उपयोग पर भी रोक लगा दी है। चार अक्टूबर 2025 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सलाह जारी कर कहा था कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को खांसी-जुकाम की दवाएं न तो दी जाएं और न ही लिखी जाएं।

मंत्रालय ने कहा, “ऐसी दवाएं आमतौर पर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं हैं। बड़े बच्चों में भी ये दवाइयां केवल चिकित्सकीय जांच और निगरानी के बाद ही दी जानी चाहिए। पिछले एक महीने के दौरान मध्यप्रदेश व राजस्थान में बच्चों की मौतें इन्हीं दूषित सीरपों के सेवन से जुड़ी पाई गई हैं। इनमें डायथिलीन ग्लाइकोल पाया गया है जो एक घातक औद्योगिक साल्वेंट है।
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