झाझा स्टेशन पर अमृत भारत ट्रेन का नहीं है ठहराव। (जागरण)
संवाद सूत्र, सिमुलतला (जमुई)। रेलवे की पटरियों पर जब कोई नई ट्रेन दौड़ती है तो वह सिर्फ लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि उस क्षेत्र के हजारों लोगों की उम्मीद लेकर दौड़ती है।
अफसोस, नए साल में रेलवे बोर्ड ने झाझा वासियों की उम्मीदों को एक बार फिर अपनी बेरुखी के पहियों तले रौंद दिया है। नाम है अमृत भारत एक्सप्रेस। झाझा के हलक में यह व्यवस्था का कड़वा घूंट बनकर उतर रही है।
ठिठुरती भोर में उम्मीदों का गुजर जाना
जरा उस पीड़ा की कल्पना कीजिए। घड़ी की सूई सुबह के 04:45 बजा रही होंगी। झाझा स्टेशन पर भोर की शांति होगी। उसी वक्त बनारस से चलकर सियालदह जाने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस अपनी पूरी रफ्तार और शान के साथ झाझा स्टेशन से गुजरेगी।
प्लेटफार्म पर खड़े यात्री ललचाई नजरों से उस ट्रेन को देखेंगे जो उन्हें कोलकाता या देवघर पहुंचा सकती थी, लेकिन वह ट्रेन उन्हें मुंह चिढ़ाते और धूल उड़ाते हुए आगे निकल जाएगी। टाइम-टेबल में झाझा के आगे लिखा पी (पासिंग) शब्द यहां के निवासियों के लिए किसी पेन (दर्द) से कम नहीं है।
स्टॉपेज नहीं, सम्मान की है बात
जमुई, सिमुलतला, सोनो और चकाई के सुदूर गांवों से आने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन किसी वरदान से कम नहीं होती, लेकिन रेलवे के इस निर्णय ने बता दिया है कि उनकी नजर में झाझा अब महज एक माइलस्टोन है, जहां ट्रेनों की गिनती तो होती है पर जनभावनाओं का कद्र नहीं।
पटरियों पर विकास दौड़ रहा है, लेकिन झाझा का नसीब आज भी स्टेशन के उसी ठंडे प्लेटफार्म पर खड़ा अपनी बारी का इंतजार कर रहा है।
झाझा की पहचान ही रेल नगरी के रूप में होती है, लेकिन विगत कुछ वर्षों से इसे इसके नाम के अनुरूप सम्मान नहीं मिल रहा। अमृत भारत एक्सप्रेस का न रुकना इसी उपेक्षा की एक बानगी मात्र है। -
कुमार विमलेश, संचालक, ग्राम भारती सर्वोदय आश्रम, सिमुलतला
आखिर झाझा को इस ट्रेन का ठहराव क्यों नहीं दिया गया? पड़ोसी स्टेशन मधुपुर और जसीडीह में ठहराव है, लेकिन झाझा को वंचित रखना क्षेत्र की जनता के साथ भद्दा मजाक है। इस भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। -
अजीत सिंह, समाजसेवी, सिमुलतला
सुबह के वक्त झाझा से गुजरने वाली यह ट्रेन कोलकाता जाने वाले यात्रियों के लिए वरदान साबित हो सकती थी। उम्मीद थी कि इससे समय की बचत होगी, लेकिन टाइम-टेबल देखकर घोर निराशा हुई है। यह दैनिक यात्रियों के लिए एक बड़ा झटका है। -
शैलेश कुमार, समाजसेवी सह पूर्व बैंक प्रबंधक
रेलवे के नक्शे पर झाझा का ऐतिहासिक महत्व रहा है, लेकिन अब इसे केवल ट्रेनों की क्रासिंग और पासिंग का केंद्र बना दिया गया है। अमृत भारत का यहां न रुकना जनप्रतिनिधियों की कमजोरी और रेलवे अधिकारियों की मनमानी को दर्शाता है। -
चंद्रदेव यादव, प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि, झाझा |