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Lohri 2026 Date: कब और क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार? पढ़ें पौराणिक कथा और महत्व

LHC0088 2026-1-11 22:28:07 views 573
  

पुरातन समय से ही पंजाब में अग्नि को संभाल कर रखा जाता था



डा. हरमहेन्द्र सिंह बेदी (कुलाधिपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश)। लोहड़ी पंजाब का विलक्षण त्योहार है। वर्ष भर पंजाबी लोहड़ी का इंतजार करते है। पंजाब की अनेक रस्में लोहड़ी के पावन त्योहार से जुड़ी हुई है। लोहड़ी ऊष्णता व ऊर्जा का संचार करने वाला वह पर्व है। जो भारतीय समाज एवं परिवार को शक्ति भी देता है और भविष्य के प्रति आस्थावान भी बनाता है। उत्तरीय भारत में लोहड़ी का पर्व जिस उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है, वह भी अपने आप में विलक्षण होता है।

बच्चे के जन्म के समय पहले वर्ष में उसकी आमद को लोहड़ी की पवित्रता के साथ जोड़ कर अनेक शुभ कार्य किए जाते है। इन कार्यों की साक्षी होती है अग्नि। अग्नि धरती का शृंगार है। अग्नि के बिना शक्ति और भक्ति के संकल्पों की सिद्धि नहीं होती। सबसे बड़ा उदाहरण तो पंजाबियों के पास है ऋग्वेद के अग्नि सूत्र। पंजाब की पावन धरा पर कभी ऋषियों ने अग्नि पूजा का विशाल सिद्धांत रखा था। पर्यावरण के प्रति भी पंजाब का यह संदेश आज विश्व को दिशा देता है। लोहड़ी इसी का अटूट हिस्सा है।

अब तो पंजाब में बच्चियों की लोहड़ी (Harvest Festival Rituals) भी मनाई जाती है। लोहड़ी ने लिंग भेद समाप्त कर दिया है। पंजाब के प्रत्येक गांव में धीयां दी लोहड़ी पर्व मना कर पंजाबी अपने प्रगतिशील सोच का प्राकट्य करते है। दुल्ला भट्टी का प्रसंग पंजाब के वीर नायकों की परंपरा को इस दिन पुनर्जीवित करता है। दुल्ला पंजाब का वीर नायक था।

अकबर के समय में वह जालिम अमीरों को लूटता था और गरीब बच्चियों की शादी में बेबाक होकर वह धन देता था। इतिहास गवाह है कि अकबर जिन वीर नायकों से डरता था, उसमें दुल्ला (Dulla Bhatti Story) प्रथम पंक्ति में आता था। वह भट्टी जाति का राजपूत था। लोहड़ी के समय ऐसे नायकों को याद करना पंजाब की वीर परंपरा के आगे नतमस्तक होना है।

पुरातन समय से ही पंजाब में अग्नि को संभाल कर रखा जाता था। पंजाबी घरों में कभी अग्नि को बुझाया नहीं जाता था। लोहड़ी के दिन इसी अग्नि के पुन: पावन रूप की पूजा होती थी। वैसे भी लोहड़ी सामाजिक संबंधों का पर्व है। परिवारों में खुशहाली महसूस करने की ऐसी संवेदना है जिसका सकारात्मक प्रभाव वर्ष भर रहता है। लोहड़ी में ऋतु (Winter Solstice Significance) बदलती है। जनमानस में नई ऊर्जा का संचार होता है और पूरा पंजाब बदलती हुई इस संवेदना को संघर्ष जीने की इच्छा में रूपांतरण कर राष्ट्र के प्रति समर्पित होता है।

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