युवा दिवस : स्वामी विवेकानंद
जागरण संवाददाता, भागलपुर। युवा दिवस : राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर स्वामी विवेकानंद से जुड़ा भागलपुर का ऐतिहासिक संदर्भ एक बार फिर सामने आया है। विश्व मंच पर भारत की आध्यात्मिक चेतना का उद्घोष करने वाले स्वामी विवेकानंद ने शिकागो धर्म सम्मेलन से पूर्व अपने भारत भ्रमण के दौरान भागलपुर की धरती पर प्रवास किया था। यह यात्रा न केवल ऐतिहासिक महत्व रखती है, बल्कि आज के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
भागलपुर की धरती पर ठहरे थे स्वामी विवेकानंद
इतिहासकारों के अनुसार, सन 1890 ईस्वी में स्वामी विवेकानंद अपने गुरु भाई अखंडानंद के साथ भागलपुर आए थे। अगस्त माह में दोनों साधु बरारी वाटर वर्क्स स्थित शिक्षाविद् बाबू मन्मथ नाथ चौधरी के आवास पर करीब सात दिनों तक ठहरे थे। प्रारंभ में साधारण वेशधारी इन साधुओं को अधिक महत्व नहीं दिया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में स्वामी विवेकानंद के असाधारण ज्ञान और व्यक्तित्व ने सभी को प्रभावित कर दिया।
टीएनबी कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डा. रवि शंकर चौधरी बताते हैं कि एक दिन मन्मथ नाथ चौधरी अंग्रेजी की पुस्तक बुद्धिज्म पढ़ रहे थे। इसी दौरान स्वामी विवेकानंद ने पुस्तक के विषय पर प्रश्न किया। अंग्रेजी भाषा, बौद्ध दर्शन, उपनिषद और वेदांत पर उनकी गहरी पकड़ देखकर मन्मथ नाथ चौधरी चकित रह गए। तभी उन्हें आभास हुआ कि उनके समक्ष कोई साधारण योगी नहीं, बल्कि एक विलक्षण आध्यात्मिक व्यक्तित्व उपस्थित है।
करीब एक सप्ताह के प्रवास के दौरान योग, वेदांत दर्शन, सनातन हिंदू धर्म और बौद्ध विचारधाराओं पर विस्तृत चर्चा हुई। भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया। बाद में जब 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद का ऐतिहासिक भाषण प्रकाशित हुआ और उनकी तस्वीरें देश-विदेश के समाचार पत्रों में छपीं, तब मन्मथ नाथ चौधरी को ज्ञात हुआ कि उनके यहां ठहरे साधु स्वयं स्वामी विवेकानंद थे।
शिकागो धर्म सम्मेलन से पहले 1890 में एक सप्ताह किया था प्रवास
डा. चौधरी के अनुसार, स्वामी विवेकानंद देवघर होते हुए भागलपुर आए थे। यहीं से उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की और बाद में बनारस के लिए प्रस्थान किया। आज भी बूढ़ानाथ मोहल्ले में स्थित रामकृष्ण मिशन स्कूल का पुराना भवन, बरारी वाटर वर्क्स में स्थापित उनकी प्रतिमा और सैंडिस कंपाउंड के पूर्वी छोर पर तिलकामांझी चौक के समीप लगी प्रतिमा उनके भागलपुर प्रवास की स्मृति को जीवंत रखे हुए हैं।
युवाओं को आज भी प्रेरित करता है संदेश
युवा दिवस के अवसर पर डॉ रवि शंकर चौधरी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का अमर संदेश— “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए”- आज भी युवाओं को दिशा देता है। यदि युवा उनके विचारों को आत्मसात करें तो वे न केवल अपने जीवन को सफल बना सकते हैं, बल्कि राष्ट्र को भी सशक्त भविष्य दे सकते हैं। स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों को साकार करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी आज के युवाओं पर ही है। |