ट्रेनों की लेटलतीफी ने तोड़ा रिकॉर्ड
मनीष कुमार, पटना। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की समयबद्धता को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। पूर्व मध्य रेलवे की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस साल ट्रेनों की रफ्तार और समय पर पहुंचने की दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सबसे चौंकाने वाली स्थिति दिसंबर महीने में रही, जहां समयपालन में 28.68 प्रतिशत की रिकार्ड गिरावट देखी गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दिसंबर महीने में ट्रेनों का समयपालन 87.38 प्रतिशत था, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 के इसी महीने में गिरकर मात्र 58.70 प्रतिशत रह गया है।
यह गिरावट यात्रियों की परेशानियों और रेलवे की परिचालन दक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सिर्फ दिसंबर ही नहीं, बल्कि पिछले कई महीनों से ट्रेनों का समयपालन गिरावट की ओर है।
अक्टूबर में समयपालन 19.65 प्रतिशत घटा, मई में 8.61 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि नवंबर में भी यह 5.21 प्रतिशत तक गिर गया। लगातार घटते आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि समस्या अस्थायी नहीं, बल्कि संरचनात्मक बनती जा रही है।
साल 2025-26 के आंकड़ों को देखें तो केवल अप्रैल और अगस्त महीने में ही मामूली सुधार देखने को मिला था। अगस्त में समयपालन 90.79 प्रतिशत तक पहुंचा था, लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार बड़ी गिरावट देखी जा रही है।
सितंबर से शुरू हुआ यह सिलसिला दिसंबर तक आते-आते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
पिछले वित्तीय वर्ष का औसत रहा बेहतर
बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 में पूर्व मध्य रेलवे का औसत समयपालन 86.69 प्रतिशत रहा था। जनवरी में यह 86.08 प्रतिशत, फरवरी में 90.29 प्रतिशत और मार्च में 89.62 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके मुकाबले चालू वित्तीय वर्ष का प्रदर्शन काफी कमजोर नजर आ रहा है, जबकि अभी भी तीन महीने शेष हैं।
यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
ट्रेनों के समय पर न चलने से यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ठंड और कोहरे के मौसम में ट्रेनों की लेटलतीफी ने यात्रियों की यात्रा योजनाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है।
नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और दूर-दराज जाने वाले यात्रियों के लिए यह स्थिति और भी कष्टदायक बन गई है।
ट्रेन ऑन डिमांड और घना कोहरा प्रमुख कारण
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, समयपालन में गिरावट के पीछे ‘ट्रेन आन डिमांड’ और वर्तमान में घना कोहरा प्रमुख कारण हैं। बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 में दिसंबर तक 6,573 स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया गया था, जबकि चालू वित्तीय वर्ष की समान अवधि में 7,351 स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं।
यानी पूर्व मध्य रेलवे में 11.84 प्रतिशत अधिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन हुआ, जिससे नियमित ट्रेनों की समयबद्धता पर असर पड़ा। यदि समय रहते परिचालन प्रबंधन, स्पेशल ट्रेनों की योजना और कोहरे से निपटने की रणनीति पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
पूर्व मध्य रेलवे में ट्रेनों के समयपालन की स्थिति (प्रतिशत में)
| माह | 2024-25 | 2025-26 | अंतर | | अप्रैल | 86.63 | 89.65 | 3.02 | | मई | 90.99 | 82.38 | 8.61 | | जून | 89.40 | 85.25 | 4.15 | | जुलाई | 90.04 | 84.63 | 5.41 | | अगस्त | 86.40 | 90.79 | 4.39 | | सितंबर | 87.19 | 82.82 | 4.37 | | अक्टूबर | 87.89 | 68.24 | 19.65 | | नवंबर | 68.99 | 63.78 | 5.21 | | दिसंबर | 87.38 | 58.70 | 28.68 |
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