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छोटे शहरों की बड़ी उड़ान: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से यूपी के हर जिले में पनप रहे नए स्टार्टअप्स

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डिजिटल टीम, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “जॉब सीकर नहीं, जॉब क्रिएटर बनो“ के विजन ने उत्तर प्रदेश को स्टार्टअप क्रांति के केंद्र में खड़ा कर दिया है। राज्य सरकार की \“स्टार्ट इन यूपी\“ पहल के तहत प्रदेश में मान्यता प्राप्त (Recognized) स्टार्टअप्स की संख्या ने 3000 की ऐतिहासिक सीमा को पार कर लिया है। नीतिगत सहयोग और पारदर्शी इकोसिस्टम के कारण उत्तर प्रदेश अब देश के सबसे तेजी से बढ़ते स्टार्टअप हब के रूप में उभर रहा है।
आंकड़ों में स्टार्टअप्स की छलांग

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप्स की वृद्धि दर ने राष्ट्रीय औसत को कड़ी टक्कर दी है:

  • स्टार्ट इन यूपी: दिसंबर 2025 में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2905 थी, जो जनवरी 2026 में बढ़कर 3011 हो गई है। यानी मात्र एक माह में 106 नए स्टार्टअप्स पंजीकृत हुए हैं।
  • स्टार्टअप इंडिया (केंद्र): केंद्र सरकार की योजना के तहत भी यूपी ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दिसंबर के 18,568 स्टार्टअप्स के मुकाबले अब यह संख्या 19,042 पहुंच गई है। पिछले एक महीने में 474 नए स्टार्टअप्स ने राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त की है।


पूंजी और मेंटरशिप का मजबूत कवच

योगी सरकार की स्टार्टअप नीति ने केवल संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता और स्थिरता पर भी ध्यान दिया है। \“स्टार्ट इन यूपी\“ नीति के तहत उद्यमियों को निम्नलिखित सुविधाएं मिल रही हैं:

  • फंडिंग और सपोर्ट: शुरुआती पूंजी (Seed Funding) और मार्केटिंग सहायता।
  • इंक्यूबेशन सेंटर्स: प्रदेश के विभिन्न जिलों में अत्याधुनिक इंक्यूबेटर केंद्रों की स्थापना, जहाँ मेंटरशिप और तकनीकी सहयोग उपलब्ध है।
  • सरल प्रक्रिया: आवेदन और मान्यता की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है।

छोटे शहरों से निकल रही प्रतिभाएं

आईटी विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में बेहतर कानून-व्यवस्था और \“ईज ऑफ डूइंग बिजनेस\“ के कारण स्टार्टअप्स अब केवल नोएडा या लखनऊ जैसे महानगरों तक सीमित नहीं हैं। टायर-2 और टायर-3 शहरों (छोटे जिलों) से भी युवा अपने नवाचार (Innovation) के साथ सामने आ रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन हो रहा है और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है।
$1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की रीढ़

डिजिटल गवर्नेंस और स्टार्टअप्स के प्रति सरकारी प्रोत्साहन ने प्रदेश के युवाओं में उद्यमिता का नया विश्वास जगाया है। स्टार्टअप्स की यह बढ़ती संख्या उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में आधारस्तंभ साबित होगी।
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