प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से हो रहा चाइनीज मांझे का इस्तेमाल। (प्रतीकात्मक चित्र)
डिजिटल डेस्क, भोपाल। चाइनीज मांझा एक बार फिर मध्य प्रदेश में जानलेवा साबित हो रहा है। प्रतिबंध के तमाम दावों के बावजूद हर साल हादसों की संख्या बढ़ रही है और प्रशासन की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। प्रदेश के लगभग सभी शहरों से चाइनीज मांझे से जुड़ी दुर्घटनाओं की शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन इंदौर सबसे संवेदनशील क्षेत्र के रूप में उभरा है। वर्ष 2026 की शुरुआत में ही यहां एक युवक की मौत हो चुकी है।
मकर संक्रांति के आसपास पतंगबाजी के दौरान ऐसे हादसे और बढ़ जाते हैं। हर घटना के बाद शासन-प्रशासन कुछ दिनों के लिए सक्रिय होता है, फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा बाजार तक पहुंच कैसे रहा है और दुकानदारों में कार्रवाई का डर क्यों नहीं है?
इंदौर में चाइनीज मांझे का कहर
इंदौर में बीते पांच वर्षों में 70 से अधिक लोग चाइनीज मांझे की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें आठ लोगों की जान चली गई।
- वर्ष 2025 में 10 घटनाएं सामने आईं, जिनमें दो मौतें हुईं।
- 15 जनवरी 2025 को फूटी कोठी ब्रिज पर 22 वर्षीय हिमांशु सोलंकी की गर्दन कटने से मौत हो गई।
- 30 नवंबर 2025 को रालामंडल क्षेत्र में बाइक सवार 16 वर्षीय गुलशन जाटव की भी इसी तरह जान चली गई।
- 11 जनवरी 2026 को 45 वर्षीय रघुवीर धाकड़ की मौत ने एक बार फिर प्रशासन की नींद तोड़ी।
दूसरे शहरों में भी लगातार घटनाएं
- उज्जैन: 15 जनवरी 2022 को जीरो प्वाइंट पुल पर 11वीं की छात्रा नेहा आंजना की गला कटने से मौत।
- ग्वालियर: 29 जनवरी को राक्सी पुल क्षेत्र में युवक दानिश कुर्रेशी घायल। बाद में दुकानों से प्रतिबंधित मांझा जब्त।
- जबलपुर: तीन दिन पहले फ्लाईओवर पर युवक घायल।
- छिंदवाड़ा: 2 जनवरी को रामगिरी गोस्वामी के गले में गंभीर चोट, जान बचाने 43 टांके लगे।
- रायसेन: 6 जनवरी को पूर्व पार्षद भारती यादव घायल, 20 टांके लगे।
- भोपाल: 2024 में पराग गोयल सहित कई लोग मांझे की चपेट में आ चुके हैं।
बिजली व्यवस्था पर भी खतरा
चाइनीज मांझा केवल इंसानी जान के लिए ही नहीं, बल्कि बिजली व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है। एमपी ट्रांसको के अनुसार, इंदौर क्षेत्र में दो वर्षों में 13 बार लाइन ट्रिपिंग हुई। जबलपुर क्षेत्र में इसी अवधि में 100 से अधिक ट्रिपिंग की घटनाएं दर्ज की गईं। अगर चाइनीज मांझा बिजली लाइन से संपर्क में आ जाए, तो पतंग उड़ाने वाले को करंट लगने का भी खतरा रहता है।
क्यों है चाइनीज मांझा इतना खतरनाक
चाइनीज मांझा नायलॉन या सिंथेटिक धागे पर कांच और मेटल पाउडर की कोटिंग से तैयार किया जाता है। इसमें एल्युमिनियम ऑक्साइड और लेड मिलाकर कांच या लोहे के चूरे से धार दी जाती है। यह ब्लेड से भी तेज होता है।
- शरीर के संपर्क में आते ही गहरी चोट
- खींचने पर टूटने की बजाय और सख्त
- हादसे के वक्त गंभीर और जानलेवा घाव
पुलिस का खुफिया तंत्र कटघरे में
सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बीट सिस्टम और खुफिया तंत्र की विफलता के कारण चाइनीज मांझा खुलेआम बिक रहा है। अवैध आपूर्ति श्रृंखला पर समय रहते कार्रवाई नहीं हो पाती। जैसे दीपावली पर अवैध कार्बाइड गन के मामलों में हुआ, वैसा ही हाल चाइनीज मांझा का है।
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हालांकि कुछ जिलों में पुलिस ने स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाए और कलेक्टरों ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए, लेकिन प्रदेशभर में एकरूप और सख्त कार्रवाई का अभाव साफ नजर आ रहा है।
चाइनीज मांझे का अवैध कारोबार करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश सभी पुलिस अधीक्षकों को पहले ही जारी किए जा चुके हैं। हम लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। इंदौर-उज्जैन में खूब कार्रवाईयां हुई हैं। स्कूल-कालेजों में लोगों को जागरूक भी कर रहे है।
- कैलाश मकवाणा, डीजीपी। |
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