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मकर संक्रांति: आस्था, विज्ञान और पोषण का अद्भुत संगम है खिचड़ी पर्व; खिचड़ी खाने के पीछे क्या है रहस्य?

LHC0088 5 hour(s) ago views 840
  

स्नान-दान से जुड़ी है गहरी आस्था



दिलीप ओझा, शाहपुर(आरा)। मकर संक्रांति, जिसे लोक परंपरा में खिचड़ी पर्व के नाम से जाना जाता है, केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं बल्कि आस्था, विज्ञान और पोषण का अनूठा संगम है। इस दिन सूर्य भगवान दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर प्रवेश करते हैं, जिसे शुभ परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण मकर संक्रांति को नए आरंभ, सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन का पर्व कहा गया है।
स्नान-दान से जुड़ी है गहरी आस्था

मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी या अन्य पवित्र जलाशयों में स्नान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन स्नान और खिचड़ी का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

स्नान के बाद खिचड़ी को प्रसाद रूप में ग्रहण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है पर्व

यह पर्व शीत ऋतु के धीरे-धीरे विदा होने और वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। इस समय खेतों में नए धान की फसल आती है और बाजारों में ताजा चावल, चूड़ा, देसी गुड़, छेमी मटर, गोभी और अन्य मौसमी सब्जियां भरपूर मात्रा में उपलब्ध होती हैं। यही कारण है कि खिचड़ी पर्व को नव अन्न उत्सव भी कहा जाता है।
खिचड़ी खाने के पीछे क्या है रहस्य

वैज्ञानिक दृष्टि से खिचड़ी को सबसे सुपाच्य और संतुलित आहार माना गया है। चावल और दाल का यह मिश्रण शरीर को आवश्यक कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर प्रदान करता है।

ठंड के मौसम के बाद कमजोर पाचन तंत्र को मजबूत करने में खिचड़ी बेहद लाभकारी मानी जाती है।
सनातन परंपरा में छिपा है विज्ञान

सनातन संस्कृति ने हजारों वर्ष पहले ही भोजन और ऋतु के संबंध को पहचान लिया था। मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की परंपरा इसी वैज्ञानिक सोच का परिणाम है।

नए अन्न और मौसमी सब्जियों से बनी खिचड़ी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है।
तिल, गुड़ और दही का भी है विशेष महत्व

इस पर्व पर तिल, गुड़, दही और तिलकुट का सेवन भी किया जाता है। तिल और गुड़ शरीर को ऊष्मा प्रदान करते हैं, पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और खनिज तत्वों से भरपूर होते हैं। वहीं दही का क्षारीय गुण पाचन सुधारने के साथ शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाता है।
शास्त्रों में वर्णित है खिचड़ी पर्व का महत्व

सहजौली गांव के आचार्य पंडित मनोज कुमार चौबे बताते हैं कि मकर संक्रांति या खिचड़ी पर्व का महत्व सनातन धर्मग्रंथों में विस्तार से वर्णित है। उन्होंने कहा कि आज जिसे विज्ञान स्वीकार कर रहा है, उसे हमारी संस्कृति ने हजारों साल पहले ही समझ लिया था।
आस्था और विज्ञान का सुंदर समन्वय

  

कुल मिलाकर मकर संक्रांति का खिचड़ी पर्व यह संदेश देता है कि भारतीय परंपराएं केवल धार्मिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और विज्ञान से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि यह पर्व आज भी उतनी ही श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है।
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