संवाद सूत्र, भिटौली। नीलगायों ने जंगल के अलावा अब भिटौली क्षेत्र के सिसवा राजा, राजमंदिर, दरौली,मुड़ीला चौधरी,सोहरौना तिवारी,इमिलिया,कृत पिपरा गांव के सिवानो में अपना बसेरा बना लिया है। क्षेत्र के खेतो में ही नील गाय झुंड में रहते हैं और आसपास के फसलों को निवाला बना रहे हैं। किसान नीलगायों से परेशान हैं और उन्हें जंगल में छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं।
दो दर्जन से अधिक नीलगाय की झुंड गेहूं की फसल को नुकसान कर रहे। समस्या यह है कि किसान फसलों की सुरक्षा के लिए कड़ाके भरी ठंड में रात में रातजगा कर खेतों की रखवाली कर रहे हैं। वन विभाग द्वारा नील गायों के कृषि बाहुल्य क्षेत्र में निरंकुश भ्रमण पर रोक के कोई जतन नहीं कर रही है।
एक बीघा गेहूं को बनाया निवाला
सिसवाराजा के किसान अनिल पटेल, उमेश पटेल ने कहा कि नील गायों की झुंड ने हमारे एक बीघा गेहूं को अपना निवाला बना लिया। मेरे सारे फसल नुकसान हो गए वही आस पास के भी किसानों की फसलों का नुकसान पहुंचा रहे है। बेसहारा पशुओं से अधिक समस्या नील गायों का झुंड है। सरकार ने बेसहारा गोवंशीय पशुओं के गोसदन की व्यवस्था की है, जंगल से भटक कर ग्रामीण क्षेत्र के खेतों में अपना बसेरा बनाए नील गायों को जंगल में ले जाने के कोई जतन नहीं कर रही है।
किसान विजयेन्द्र पटेल,अजय पटेल, विजय पटेल, कैलाश मणि त्रिपाठी, कैलाश सिंह, असफाक खां,शैलेष पटेल,एकरार खां,सुनील पटेल, हरिशंकर पटेल, कपिल चौधरी, बेचन गुप्ता, संजय विश्वकर्मा,सर्वेश पटेल, विनोद यादव, सुरेश पटेल, सदानंद पटेल, बैजनाथ विश्वकर्मा, संजय विश्वकर्मा, पन्नेलाल चौहान, सीताराम यादव,सुग्रीव पासवान आदि लोगों ने नीलगायों की झुंड को पकड़ कर वन विभाग की टीम से जंगल में छोड़ने की मांग की है। रेंजर पकड़ी सुशांत त्रिपाठी ने कहा कि वाचरों को निगरानी के लिए लगाया जाएगा जिससे नील गायों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जा सके। |