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सुरक्षा वापस ले सकते हैं...सिद्धांतों से समझौता नहीं करूंगा; IAS एसोसिएशन के बयान पर बोले मंत्री विक्रमादित्य सिंह

deltin33 2026-1-15 20:58:05 views 1079
  

IAS एसोसिएशन के बयान पर बोले मंत्री विक्रमादित्य सिंह (फाइल फोटो)



जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अधिकारियों को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मैं उम्र में छोटा हूं और किसी भी तरह के टकराव या विवाद की राजनीति में विश्वास नहीं रखता हूं।

सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बयान से उपजे राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद पर मीडिया प्रतिनिधियों को प्रतिक्रिया देते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश की जनता के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।

उनका कहना था कि वे इस मुद्दे पर पहले ही अपनी स्थिति साफ कर चुका हैं और सभी संस्थाओं व पदों का सम्मान करता हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक संघीय गणराज्य है, जहां संविधान के तहत हर संस्था और पद की जिम्मेदारी तय है। जनप्रतिनिधियों का मूल उद्देश्य केवल जनता की सेवा होना चाहिए। वह इस कुर्सी पर जनता के जनादेश से बैठे हैं और उनकी पहली प्राथमिकता ‘सर्विस आफ द पीपल’ है।

उन्होंने दो टूक कहा कि कोई भी सार्वजनिक सेवक खुद को शासक समझने की भूल न करे। अगर कहीं जनता के हित प्रभावित होते हैं या कोई कमी नजर आती है, तो उसे उठाना जनप्रतिनिधियों का दायित्व और नैतिक जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी से वह कभी पीछे नहीं हटेंगे।

उन्होंने अधिकारियों के रुख और मुख्यमंत्री से अपॉइंटमेंट को लेकर भी विक्रमादित्य सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके मन में आईएएस एसोसिएशन और सभी अधिकारियों के लिए पूरा सम्मान है, लेकिन प्रदेश के लोग इतने कमजोर नहीं हैं कि मुझे किसी अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता पड़े। प्रदेश की जनता का प्यार, समर्थन और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

उन्होंने साफ कहा कि मुझे किसी और सुरक्षा की जरूरत नहीं है और जो भी सुरक्षा वापस लेनी है, ले सकते हैं। सरकार के भीतर मंत्रियों के बीच इंटरनेट मीडिया पर समर्थन और विरोध की चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन वह अपने सिद्धांतों, नैतिक मूल्यों और संस्कारों से कभी समझौता नहीं करेंगे। इन्हीं मूल्यों से व्यक्ति की पहचान बनती है।

विक्रमादित्य सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि वह शिमला हो या दिल्ली, हर मंच पर हिमाचल प्रदेश के लोगों के मुद्दे उठाते रहेंगे। प्रदेश के 75 लाख लोगों के प्रति उनकी जवाबदेही है और जहां भी उन्हें लगेगा कि हिमाचल के हितों से समझौता हो रहा है, वहां वह लगातार आवाज उठाते रहेंगे।
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