search

जौनपुर में 2009 से है घातक मांझे पर प्रतिबंध, न बिक्री रुकी और न ही मौतों का सिलसिला

LHC0088 Yesterday 09:58 views 119
  

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण



जागरण संवाददाता, जौनपुर। वर्ष 2009 से ही घातक मांझा पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद न ही इसपर रोक लग सकी न ही मौतों का सिलसिला थमा। प्रशासन के तमाम दावों के बीच नगर समेत ग्रामीण अंचलों में इसे बेचा जाता है।  

नगर के ताड़तला, नवाब युसुफ रोड, सिपाह, शाही किला, लाइन बाजार, पुरानी बाजार, रूहट्टा, ओलंदगंज, चहारसू, नखास, पालिटेक्निक चौराहा सहित आदि इलाकों में प्रतिबंधित मांझा बेचे जाने का प्रमुख केंद्र है।  

बीते 11 दिसंबर को शहर के उमरपुर (हरिबंधनपुर) निवासी 40 वर्षीय शिक्षक संदीप तिवारी की मौत के बाद जब पुलिस ने कार्रवाई शुरू की तो इसे चोरी-छिपे बेचा जाने लगा और 14 जनवरी को केराकत के शेखजादा मोहल्ला निवासी 23 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट समीर हाशमी की जान चली गई।

यह भी पढ़ें- जौनपुर रेलवे क्रासिंग पर दस साल से लंबित है फ्लाई ओवर ब्रिज, जाम से प्रभावित होता है प्रयागराज का सफर

अधिक से अधिक पतंग काटने के लिए इस मौत की डोर का इस्तेमाल किया जाता है। जानकार बताते हैं कि नायलान और एक मैटेलिक पाउडर को मिलाकर इसे बनाया जाता है। पुलिस समय-समय पर इसे लेकर कार्रवाई करती जरूर है, लेकिन प्रतिबंधित मांझा पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध नहीं लक पा रहा है।
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
151275

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com