
कोर्ट सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टेमिक चेंज और शौर्य तिवारी की याचिका पर सुनवाई कर रहा, जिसमें सरकार को इन एप के प्रसार पर रोक लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि ये ऐप पूरे देश में बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। पीठ ने 4 नवंबर को सुनवाई के लिए स्थानांतरित की गई कई याचिकाओं को पहले ही सूचीबद्ध कर लिया है। ये याचिकाएं ऑनलाइन गेमिंग कानून को चुनौती देती हैं, जो ऑनलाइन मनी गेम पर रोक लगाता है और उनसे जुड़ी बैंकिंग सेवाओं और विज्ञापन पर भी रोक लगाता है।
पीठ ने 17 अक्तूबर को कहा था कि सीएएससी की याचिका एक अहम मुद्दा उठाती है और गुप्ता से याचिका की एक प्रति सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील को देने के लिए कहा। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील गुप्ता से कहा था, यह एक अहम मुद्दा है। आप इसकी एक प्रति उन्हें दे दें। उन्हें इसे पढ़ने दें। वह हमारे पास वापस आएंगे।
याचिका में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, सूचना और प्रसारण, वित्त, तथा युवा मामले और खेल मंत्रालय से यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे ऑनलाइन गेमिंग संवर्द्धन और विनियमन अधिनियम, 2025 और राज्य विधानसभाओं द्वारा बनाए गए कानूनों की सही व्याख्या करें, ताकि सोशल और ई-स्पोर्ट्स गेम की आड़ में चल रहे ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी गेम पर रोक लगाई जा सके।
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