बागपत में रिश्वत लेने के आरोपित लिपिक (लाल घेरे में) से पूछताछ करती एंटी करप्शन की टीम। जागरण
जागरण संवाददाता, बागपत। मेरठ की एंटी करप्शन टीम ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के कार्यालय के कनिष्ठ लिपित को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोपित ने बकरी पालन योजना में अनुदान दिलाने की एवज में रिश्वत मांगी थी।
शामली के गांव खंदरावली निवासी कनिष्ठ लिपिक अश्वनी कुमार मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. अरविंद त्रिपाठी के कार्यालय में 24 जुलाई 2024 से तैनात है। ग्राम बरनावा निवासी सतीश वाल्मीकि का कहना है कि उसने पांच माह पहले बकरी पालन योजना में अनुदान के लिए आवेदन किया था। उसका आवेदन स्वीकार हो गया था।
आरोप है कि अनुदान राशि (Subsidy) दिलाने के एवज में कनिष्ठ लिपिक अश्वनी कुमार ने 12 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। उसके असमर्थता जताने पर पांच हजार रुपये की मांग करने लगा। उसने मेरठ में एंटी करप्शन की टीम को जानकारी दी।
उसी क्रम में उसने शुक्रवार दोपहर करीब 12:40 बजे कनिष्ठ लिपिक अश्वनी कुमार को पांच हजार रुपये लेने के लिए मोबाइल से काल की। लिपिक अश्वनी विकास भवन की कैंटीन में रुपये लेने के लिए पहुंचा। एंटी करप्शन की टीम ने अश्वनी को पकड़ लिया। टीम आरोपित को लेकर कोतवाली पहुंची।
कोतवाली प्रभारी बृजेश कुमार ने बताया कि एंटी करप्शन टीम के इंचार्ज इंस्पेक्टर योगेंद्र कुमार ने आरोपित अश्वनी कुमार के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। आरोपित को शनिवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
सतीश वाल्मीकि का कहना है कि वह समाज के 96 गांवों के चौधरी हैं। कनिष्ठ लिपिक अश्वनी कुमार से बोला गया था कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। समाज के चौधरी होने का भी हवाला दिया गया था। इसके बाद भी लिपिक रुपये मांगता रहा। परेशान होकर एंटी करप्शन की टीम से शिकायत की गई।
सिस्टम में एक बार फिर उजागर हुआ भ्रष्टाचार
प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार को लेकर बहुत ही गंभीर है। इसके बावजूद सरकारी सिस्टम से भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो रहा है। पशुपालन विभाग के कनिष्ठ लिपिक अश्वनी कुमार के पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद एक बार फिर सिस्टम में भ्रष्टाचार उजागर हो गया है। यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े जा चुके हैं।
राजस्व लेखपाल विनोद कुमार 18 अक्टूबर 2024 को साढ़े तीन हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था। जिला पंचायत के प्रशासनिक अधिकारी सुभाष तोमर को मई 2023 में 10 हजार रुपये रिश्वत लेते एंटी करप्शन की टीम ने गिरफ्तार किया था।
इससे पहले कलक्ट्रेट में तत्कालीन असलहा लिपिक समेत कई कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा जा चुका है। बहुत कम लोग ही हिम्मत कर भ्रष्टाचार करने वालों को पकड़वा पाते हैं। ज्यादातर लोग या तो रिश्वत दे देते हैं या किसी के सामने जिक्र किए बगैर अपने घर पर बैठ जाते हैं। यूपी-हरियाणा बार्डर की निवाड़ा चौकी पर चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली करने के मामले में दो पुलिसकर्मियों को जेल जाना पड़ा था। |
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