बैंक में 21 करोड़ रुपये के घोटाले में लिप्त बैंक कर्मी होंगे बर्खास्त।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। यूपी स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की गोंडा शाखा में हुए 21 करोड़ रुपये के घोटाले में आरोपित मुख्य प्रबंधक सहित चार कार्मिकों को बर्खास्त करने की तैयारी प्रबंधन कर रहा है। इसके लिए दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी गई है। जांच कमेटी आरोपियों को आरोप पत्र देने जा रही है। जवाब आने के बाद बर्खास्तगी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
आरोपियों से रिकवरी के लिए उनकी संपत्तियों की कुर्की के साथ ही अन्य कार्रवाई भी होगी, रिकवरी के लिए संयुक्त आयुक्त लखनऊ मंडल रत्नाकर सिंह को नामित किया गया है।
बता दें कि प्रदेश सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों के बाद सहकारिता विभाग के बैंकों की स्थिति सुधरी है, लोगों का विश्वास इन बैंकों पर बढ़ रहा था। इस घोटाले से सहकारिता विभाग की छवि को धक्का लगा है। महाप्रबंधक मुख्यालय अशोक कुमार और उप महाप्रबंधक अनिल सिंह इस घोटाले की जांंच करेंगे।
जांंच टीम द्वारा एक-दो दिनों के अंदर आरोपियों को चार्ज शीट देने की तैयारी है। बताया जाता है कि यूपीसीबी प्रबंधन को घोटाले की जानकारी जुलाई में हो गई थी। मुख्यालय के अधिकारियों ने सिस्टम में जांच के दौरान यह मामला पकड़ा था।
प्रबंधन ने आरबीआई के सीए से भी इस प्रकरण की जांच कराई। घोटाला पूरी तरह पकड़ में आने के बाद पुलिस में एफआइआर दर्ज कराई गई।
घोटाले में लिप्त कार्मिकों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। यूपीसीबी के एमडी आरके कुलश्रेष्ठ के मुताबिक आरोपित मुख्य प्रबंधक पवन कुमार पाल, प्रबंधक अजय व सुशील गौतम और सहायक कैशियर पवन कुमार के साथ ही 16 लोगों के खिलाफ नामजद एफआइआर दर्ज कराई गई है। चारों कार्मिकों को निलंबित कर दिया गया है। मुख्य प्रबंधक पाल की पत्नी व दो बेेटे भी नामजद हैं। मुख्य प्रबंधक ने पत्नी, दो बेटों के साथ ही खुद अपने नाम से भी अनियमित तरीके से लोन पास किया था। पूरा घोटाला ही लोन स्वीकृति के माध्यम से किया गया है। -जेपीएस राठौर, सहकारिता राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार |
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