प्रतीकात्मक फोटो।
जागरण संवाददाता, इटावा। जनपद की भरथना तहसील के अंतर्गत पागल बाबा आश्रम पर अनूठा मुक्तिधाम बनाया गया है। यहां आने वाले शवों का अंतिम संस्कार उनकी राशि के अनुसार होता है। 12 राशियों के लिए अलग-अलग विशाल मंडप बनाए गए हैं, प्रत्येक मंडप में चार-चार चबूतरे हैं। यदि मृतक के स्वजन को राशि का अंदाज नहीं है तो प्रत्येक राशि के लिए बनाए गए मंडप पर राशि के नीचे वे अक्षर लिखे गए हैं जिनके आधार पर राशि तय की जाती है। यहां गरीब लोगों के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी व शव वाहन मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है।
भरथना नगर से करीब 5 किलोमीटर दूर दक्षिण की ओर सेंगर नदी किनारे बिरौधी मोड़ 31 बीघा से अधिक भूमि पर बने इस धाम में एक ओर ओम श्री पागल बाबा का मंदिर के साथ जल कुंड और विभिन्न देवी देवताओं की प्रतिमा स्थापित हैं। जहां पर प्रतिदिन विधि विधान के अनुसार मंदिर के मुख्य न्यासी श्याम सुंदर चौरसिया पूजा अर्चना करते हैं।
वहीं दूसरी ओर स्थित नागवंशीय पंचतत्व विलीन स्थल पर राशि के आधार पर शवों का दाह संस्कार होता है। यह भारत का पहला एक ऐसा मुक्तिधाम जहां बनारस के मनिकर्णिका घाट से लाई गई अग्नि से राशियों के आधार पर दाह संस्कार होता है। नागवंशी पंचतत्व विलीन स्थल मुक्तिधाम पर प्रत्येक दिन नक्षत्र ,राशि,नवग्रह के आधार पर एक नये कलश की स्थापना के साथ हवन पूजन होता है।
समाप्ति की ओर था घाट
चैरासिया बताते हैं कि 1993 में उनके भाई की मृत्यु के बाद ग्राम कुंवारा के समीप स्थित मरघट पर जब वह अंतिम संस्कार करने के लिए पहुंचे तो घाट समाप्ति की ओर था। जिससे उनका मन विचलित हो गया और उनके मन में कई विचार उत्पन्न होने लगे। ओम् श्री पागल बाबा धाम पर वर्ष 2016 में मां के विसर्जन के लिए बनाए गए जल कुंड में मां की मूर्ति विसर्जन के बाद आयोजित भंडारे के समय उनके मन में मोक्ष धाम को लेकर कई विचार आए,उस समय मंदिर की देखरेख कर रहे शंकर मिस्त्री ने मंदिर पर न जाने क्या ऐसा देखा कि उन्होंने सुबह मंदिर न छोड़ने की बात कही।
चौरसिया ने बताया कि उनकी ताई के निधन के साथ ही 2017 में मुक्तिधाम का निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया ,जिसे 27 नक्षत्र, 12 राशि ,9 ग्रह और चार युग कुंड के आधार पर तैयार किया गया है इस मुक्ति धाम को नागवंशी पंचतत्व विलीन स्थल मोक्ष धाम के नाम से जाना जाता है। मुख्य न्यासी बताते हैं कि जो उन्हें स्वप्न में आदेश मिलता है उसके अनुसार ही कार्य करते हैं और अगले दिन अपनी दिनचर्या को निर्धारित करते हैं और उसी के आधार पर कार्य करते हैं। यज्ञ स्थल पर प्रत्येक दिन नये कलश की स्थापना होती है।
12 राशियों और 27 नक्षत्रो का बना है यज्ञ
नवग्रह, 12 राशि , 27 नक्षत्रों, 9 नवग्रह और चार युग कुंड का मुक्तिधाम के सबसे पहले हिस्से में नवग्रह, 12 राशियों और 27 नक्षत्रो का यज्ञ बना हुआ है। इसमें प्रतिदिन एक नए कलश की स्थापना के साथ सुबह से हवन की शुरुआत हो जाती है। मंदिर भी अपने आप में अनोखा है। सबसे खास बात यह है कि यज्ञ स्थल पर स्थापित प्रत्येक राशि की प्रतिमा के लिए उसके रंग के पत्थर का ही इस्तेमाल किया गया है।
रशियों के आधार नक्षत्रों की प्रतिमाएं बनी हुई हैं। मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए यहां वाराणासी के मनिकर्णिका घाट से 6 साल पहले अग्नि लाई गई थी। उसे एक हवन कुंड में रखा गया। यह अग्नि तब से लगातार जल रही है। रोजाना सुबह इस कुंड में हवन होता है। इसके साथ ही अग्नि बंद न हो इसके लिए इसमें लगातार लकड़ियां डाली जाती हैं। इस कार्य के लिए मंदिर पर एक सेवादार लगा रहता है।
आधार कार्ड से होतीे है पहचान
मंदिर के मुख्य न्यायसी श्यामसुंदर चौरासिया बताते हैं की मुक्तिधाम में दाह संस्कार करने वाले आने वाले व्यक्ति का आधार कार्ड देखकर विधि विधान के साथ किया अंतिम संस्कार किया जाता है, उदाहरण के तौर पर अगर व्यक्ति का नाम श्याम है और उसकी राशि जो बन रही है उसके आधार पर ही उसकी राशि के मंडप अंतिम संस्कार किया जाता है। भविष्य में वातानुकूलित शव दाह ग्रह को भी बनवा रहे हैं। |
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