राष्ट्रीय परीक्षण शाला में जूते के लैब में टेस्टिंग करते विज्ञानी। जागरण
हसीन शाह, गाजियाबाद। कमला नेहरू नगर स्थित राष्ट्रीय परीक्षणशाला (एनटीएच) परिसर में अत्याधुनिक फुटवियर टेस्टिंग लैब बनाई गई है। इसमें मशीनों को इंस्टाल किया जा रहा है। लैब में अब जूते, चप्पल और सैंडल की विज्ञानिक जांच की जाएगी। सरकार के नए नियमों के तहत अब कोई भी फुटवियर कंपनी बिना टेस्टिंग अपने उत्पाद बाजार में नहीं बेच सकेगी। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता के फुटवेयर मिलेंगे। सेहत के लिए नुकसानदेह घटिया फुटवियर बाजार से बाहर हो जाएंगे।
जांच रिपोर्ट पर विश्वसनीयता कम
बाजार में बिकने वाले फुटवियर की गुणवत्ता पर भारतीय माकन ब्यूरो (बीआईएस) नजर रखता है। अब बाजार में बिना आईएसआई मार्क के फुटवियर नहीं बेच सकते हैं। बिना मानक के बने जूते, चप्पल और सैंडल सेहत के लिए नुकसानदायक भी होते हैं। जूते-चप्पलों की जांच अभी तक निजी लैब में की जा रही थी। इन लोगों की जांच रिपोर्ट पर विश्वसनीयता कम थी।
अब जांच रिपोर्ट का है इंतजार
भारत माकन ब्यूरो खुद बाजार या कंपनी से सैंपल लेकर जांच करता था। अब भारत सरकार ने इसकी अलग से सरकारी लैब स्थापित की है। यह लैब एनटीएच परिसर में बनाई गई। इसमें जांच मशीनों को इंस्टाल करने का काम किया जा रहा है। इसमें बाकायदा विज्ञानी जूते-चप्पलों की जांच करेंगे। जांच रिपोर्ट के बाद ही कंपनियां बाजार में फुटवियर बेच सकेंगी।
लैब में इस तरह होंगे टेस्ट
लैब में फुटवियर मजबूती, सोल की घिसावट क्षमता, फिसलन प्रतिरोध (स्लिप रेजिस्टेंस), लचीलापन, वजन सहन करने की क्षमता, सिलाई और चिपकाने की जांच की जाएगी। इसके अलावा चमड़ा, रबर और सिंथेटिक मटीरियल में इस्तेमाल किए गए रसायनों की भी जांच होगी। जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह त्वचा के लिए हानिकारक न हों। बच्चों और महिलाओं के फुटवियर के लिए विशेष सुरक्षा मानकों पर भी परीक्षण किया जाएगा। मानक से अधिक ऊंचे हील के जूते या सैंडल नहीं बना सकेंगे।
इसलिए पड़ी टेस्टिंग की जरूरत
बीते कुछ वर्षों में बाजार में सस्ते और घटिया फुटवियर की भरमार हो गई थी। कई मामलों में जूते-चप्पल जल्दी टूट जाते थे। फिसलन के कारण लोग चोटिल हो जाते थे। खराब सामग्री से त्वचा रोग की शिकायतें भी सामने आई थीं। गुणवत्ता नियंत्रण की कमी को देखते हुए सरकार ने फुटवियर को अनिवार्य गुणवत्ता मानकों के दायरे में लाने का फैसला किया था। इसी क्रम में आईएसआई मार्क को जरूरी किया गया।
आम लोगों को मिलेगा लाभ
टेस्टिंग के बाद बिकने वाले फुटवियर से उपभोक्ताओं को गुणवत्ता और सुरक्षा की गारंटी मिलेगी। जूते-चप्पल ज्यादा टिकाऊ होंगे। जिससे बार-बार खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे पैसा भी बचेगा। फिसलन और टूट-फूट से होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी। त्वचा के लिए सुरक्षित सामग्री इस्तेमाल होने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम घटेगा।
“फुटवियर की लैब बनकर तैयार हो गई है। इसमें मशीनें इंस्टाल की जा रही है। लैब में जांच कर सेहत के लिए हानिकारक फुटवियर का पता लगाया जाएगा। बीआइएस भी इस लैब में जूते-चप्पल की जांच करा सकेगा।“
-आलोक कुमार श्रीवास्तव, महानिदेशक, एनटीएच
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