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हरियाणा: शराब की लत बन रही साइलेंट किलर, दिमाग से लेकर दिल और लीवर तक को कर रही तबाह

LHC0088 4 hour(s) ago views 660
  

हृदय रोग के साथ शरीर खुद को गर्म नहीं रख पाने जैसी बीमारियों को दे रहे जन्म (फाइल फोटो)



नवनीत शर्मा, भिवानी। आज के समय में शराब को कई लोग तनाव दूर करने या शौक के तौर पर लेते हैं, लेकिन यही शराब धीरे-धीरे शरीर के लिए जहर बनती जा रही है। शराब का असर सिर्फ लीवर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सबसे पहले दिमाग पर हमला करता है और फिर दिल, ब्लड प्रेशर, पेट और पूरे शरीर को अपनी चपेट में ले लेता है।

लंबे समय तक शराब पीने से याददाश्त कमजोर होना, डिप्रेशन, दिल की बीमारी, कैंसर और लकवा जैसी गंभीर समस्याएं जन्म ले रही हैं। चिकित्सक इसे एक साइलेंट किलर बता रहे हैं, जो धीरे-धीरे इंसान की सेहत और जिंदगी दोनों को खोखला कर देता है। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कालेज की फिजिशियन ओपीडी में रोजाना 10 से 15 शराब की वजह से बीमारियों की चपेट में आए मरीज पहुंच रहे है।

गर्भावस्था के दौरान शराब का सेवन मां और गर्भ में पल रहे बच्चे, दोनों के लिए बेहद खतरनाक होता है। शराब सीधे मां के रक्त के जरिए बच्चे तक पहुंच जाती है, जिससे उसके शारीरिक और मानसिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ता है। शराब पीने से बच्चे का विकास धीमा हो सकता है और जन्म के समय उसका वजन सामान्य से कम रहता है।

गर्भावस्था में शराब का सेवन करने से बच्चे के दिमाग को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है, जिसे ब्रेन डैमेज कहा जाता है। इससे बच्चे में सीखने की क्षमता कम हो सकती है और भविष्य में व्यवहार संबंधी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

सर्दियों का मौसम आते ही कई लोग ठंड से बचने के लिए बाहर बैठकर शराब पीना शुरू कर देते हैं। आम धारणा है कि शराब शरीर को गर्म रखती है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह सोच पूरी तरह गलत है। चिकित्सकों के मुताबिक शराब पीने से शरीर को कुछ समय के लिए गर्मी का अहसास जरूर होता है, लेकिन वास्तव में यह शरीर की रक्त नलिकाओं को फैला देती है, जिससे शरीर की अंदरूनी गर्मी तेजी से बाहर निकलने लगती है।

इसका नतीजा यह होता है कि शरीर का तापमान अचानक गिर जाता है और व्यक्ति हाइपोथर्मिया की चपेट में आ सकता है। हाइपोथर्मिया एक खतरनाक स्थिति है, जिसमें शरीर खुद को गर्म नहीं रख पाता। विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है, जिसे हालिडे हार्ट सिंड्रोम भी कहा जाता है। ब्लड प्रेशर का अचानक बढ़ना या गिरना भी आम समस्या है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है।

सर्दियों में शराब पीने के नुकसान:

- शरीर का तापमान तेजी से गिरता है।
- हाइपोथर्मिया का खतरा।
- दिल की धड़कन अनियमित होने की आशंका।
- ब्लड प्रेशर असंतुलित होता है।
- इम्यूनिटी कमजोर होती है।
- सर्दी-जुकाम, निमोनिया का खतरा बढ़ता है।

पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजिशियन डॉ. यतिन गुप्ता ने कहा कि शराब रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है। खुले में ठंड के संपर्क में रहकर शराब पीना इस खतरे को और बढ़ा देता है, खासकर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए। सर्दियों में शराब से दूरी बनाए रखना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

इसकी जगह गर्म पानी, सूप, दूध, काढ़ा और पौष्टिक भोजन का सेवन करना चाहिए। साथ ही पर्याप्त गर्म कपड़े पहनना और शरीर को ठंड से बचाना बेहद जरूरी है। सर्दियों में शराब से बचें, गर्म व संतुलित आहार लें और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
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